स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय 10 से 19 वर्ष की किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने में सुधार योजना लागू करता है। यह योजना मासिक धर्म के बारे में जागरूकता बढ़ाने, सैनिटरी नैपकिन की सुलभता बढ़ाने और इनके सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल निपटान को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने अन्य संबंधित मंत्रालयों के साथ व्यापक विमर्श के बाद स्कूली बच्चियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति तैयार की है। यह सस्ते मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादों, लिंग अनुकूल शौचालयों और सुरक्षित निपटान सुविधा सुलभ बनाता है, स्कूली पाठ्यक्रम में मासिक धर्म स्वच्छता शिक्षा को बढ़ावा देता है, और सभी स्कूलों में इसके प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता उत्पन्न करता है। इसके अलावा राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम में शिक्षकों के साथ ही सहायक नर्स मिडवाइफ, मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता-आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जैसे स्वास्थ्य क्षेत्र के अग्रिम स्तर के कर्मचारी शामिल हैं। 10-19 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने की योजना सरकार द्वारा वर्ष 2011 से कार्यान्वित की जा रही है। इस योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं: किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना किशोरियों द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता और उपयोग को बढ़ाना सैनिटरी नैपकिन का पर्यावरण के अनुकूल सुरक्षित निपटान सुनिश्चित करना। यह योजना प्रारंभ में 2011 में 17 राज्यों के 107 चयनित जिलों में लागू की गई थी, जिसमें ग्रामीण किशोरियों को 6 रुपये में सैनिटरी नैपकिन का एक पैक "फ्रीडेज़" के रूप में उपलब्ध कराया गया था। 2014 से, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सैनिटरी नैपकिन के पैक की विकेंद्रीकृत खरीद के लिए धनराशि प्रदान की जा रही है, ताकि ग्रामीण किशोरियों को 6 रुपये प्रति पैक की रियायती दर पर ये पैक उपलब्ध कराए जा सकें। आशा कार्यकर्ता वितरण के लिए जिम्मेदार बनी रहेंगी, उन्हें बेचे गए प्रत्येक पैक पर 1 रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा और उनके व्यक्तिगत उपयोग के लिए हर महीने नैपकिन का एक पैक मुफ्त मिलेगा। वे मासिक धर्म स्वच्छता के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने और अन्य प्रासंगिक यौन और प्रजनन स्वास्थ्य मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों या ऐसे अन्य मंचों पर किशोरियों के लिए मासिक बैठकें आयोजित करेंगी। मासिक धर्म स्वास्थ्य (एमएचएस) के इर्द-गिर्द आईईसी सामग्री की एक श्रृंखला विकसित की गई है, जिसमें किशोरियों के बीच सुरक्षित और स्वच्छ मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रथाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए 360 डिग्री दृष्टिकोण का उपयोग किया गया है। इसमें किशोरियों के लिए ऑडियो, वीडियो और पठन सामग्री और किशोरियों के साथ संवाद करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं और अन्य जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए जॉब-एड शामिल हैं। इसके अलावा, वर्ष 2015-16 के बाद से 'राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन' द्वारा समर्थित मासिक धर्म स्वच्छता योजना, राज्यों के प्रस्तावों के आधार पर राज्य कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना द्वारा संचालित हो रही है। राज्यों को प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से सैनिटरी नैपकिन पैक की खरीद का निर्देश दिया गया है। 'स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली' के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 में, लगभग 34 लाख 92 हजार किशोरियों को हर महीने सैनिटरी नैपकिन पैक प्रदान किया गया। सरकार ने सस्ती कीमत पर सैनिटरी नैपकिन और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की सुलभता के लिए भी पहल की है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत फार्मास्यूटिकल्स विभाग प्रधानमंत्री भारतीय जन-औषधि परियोजना कार्यान्वित करता है, जो महिलाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत, देश भर में स्थापित 16 हजार से अधिक जन-औषधि केंद्र केवल एक रुपए में 'सुविधा' नाम का ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन पैड प्रदान करते हैं। बायोडग्रेडेबिलिटी परीक्षण एएसटीएम डी- 6954 मानकों पर आधारित ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सामग्री के साथ बनाए गए ये सैनिटरी नैपकिन पर्यावरण अनुकूल हैं। ‘मिशन शक्ति’ के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान में भी मासिक धर्म स्वच्छता और सैनिटरी नैपकिन के उपयोग के बारे में जागरूकता पैदा की जा रही है। स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय ने भी स्वच्छता और साफ-सफाई व्यवहार में परिवर्तन लाने की पहल में ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन पर राष्ट्रीय दिशानिर्देश तैयार किए हैं। स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग एक समेकित योजना समग्र शिक्षा' चलाता है, जिसके तहत मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विभिन्न पहल के लिए राज्य विशिष्ट परियोजनाओं को सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनों और इस्तेमाल पैड के निपटान के लिए भस्मकों की स्थापना का प्रावधान किया गया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय किशोरियों के लिए योजना क्रियान्वित कर रहा है जिसके तहत उनके स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति में सुधार किया जा रहा है और उन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा में वापस आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय ने इस हेतु सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, केंद्रीय विद्यालय संगठन और नवोदय विद्यालय समिति जैसे स्वायत्त निकायों के प्रमुखों को दिनांक 07.06.2024 को एक परामर्श पत्र जारी किया है। मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ASHAs) की भूमिका इस योजना के अंतर्गत आशा कार्यकर्ताओं (आशा) की भूमिका सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में समान है। आशा कार्यकर्ता अपने क्षेत्र की किशोरियों के साथ मासिक बैठकें आयोजित करती हैं, जिनमें मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन सहित स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर चर्चा की जाती है। मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) द्वारा किशोरियों को रियायती दरों पर सैनिटरी नैपकिन के पैकेट उपलब्ध कराए जाते हैं।