भूमिका रजोनिवृत्ति जिसे चिकित्सीय भाषा में मेनोपोज कहा जाता है एक ऐसी घटना है जिसमे से सभी महिलाओं को गुजरना पड़ता हैं। महिलाओं में उम्र के साथ शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन में कमी आने के कारण मासिक धर्म अथवा मेंसट्रूएसन साईकल शुरुआत में अनियमित होते है और अंततः बंद हो जाते हैं। भारतीय महिलाओं में सामान्य तौर पर 45 से 50 वर्ष के बीच में रजोनिवृत्ति आती हैं और इस पूरे बदलाव में 2 से 10 वर्ष लग जाते हैं। महिलाओं में एस्ट्रोजन हॉर्मोन में कमी के कारण कई तरह की शारीरिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता हैं। कई महिलाए शरीर में होनेवाले इस बदलाव के कारण होनेवाली समस्या और उनके उपाय से अनजान होने के कारण जीवन का लगभग एक तिहाई हिस्सा परेशानी में गुजारती हैं। महिलाओं में रजोनिवृत्ति से जुडी समस्याओं को लेकर जागरूकता लाने के लिए हर वर्ष 18 अक्टूबर को वर्ल्ड मेनोपोज डे मनाया जाता हैं। रजोनिवृत्ति के कारण महिलाओं में रजोनिवृत्ति होने के कारण इस प्रकार हैं - उम्र के साथ प्राकृतिक रूप में एस्ट्रोजन हॉर्मोन की कमी के कारण अंडाशय अथवा गर्भाशय ऑपरेशन द्वारा किसी कारणवश निकाल देने पर रेडिएशन या केमोथेरपी के कारण अंडाशय में बदलाव के कारण जब किसी कारणवश शरीर में एस्ट्रोजन की निर्मिति कम होती हैं रजोनिवृत्ति के लक्षण रजोनिवृत्ति के समय महिलाओं में कई समस्या निर्माण होती है जिनमे से कुछ समय के साथ ठीक हो जाती है तो कुछ हमेशा के लिए तकलीफ देती रहती हैं। रजोनिवृत्ति के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं - शारीरिक लक्षण रजोनिवृत्ति के कारण शरीर में नीचे दी हुई शारीरिक लक्षण नजर आते हैं - अनियमित मासिक धर्म जोड़ो में दर्द, कमजोर हड्डियां गर्म पसीने छूटना वजन बढ़ना और शरीर फूलना नींद में कमी बार-बार पेशाब के लिए जाना अथवा पेशाब में संक्रमण होना सिरदर्द चक्कर त्वचा और बालों का सूखापन योनि में सूखापन और खुजली कमजोर स्मरणशक्ति अनियमित और तेज धड़कन ह्रदय रोग मानसिक लक्षण रजोनिवृत्ति के कारण शरीर में नीचे दी हुई मानसिक लक्षण नजर आते हैं - बैचेनी चिंता चिड़चिड़ापन ध्यान केंद्रित न कर पाना उदासीनता यौन इच्छा का अभाव महिलाओं में रजोनिवृत्ति से पहले एस्टोजन हॉर्मोन के कारण कई रोगों से सुरक्षा प्राप्त होती हैं। इस हॉर्मोन में कमी आने से रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं को ऊपर दी समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं और इन समस्यों को दूर करने के लिए कुछ उपाय करने जरुरी होते हैं। लेखक: डॉ. परितोष त्रिवेदी निरोगिकाया