शौचालयों के प्रकार स्वच्छकर जलबंद शौचालय निर्माण की विधि स्थान का चयन सबसे पहले शौचालय के लिये स्थल चयन करें। चयन करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें शौचालय के लिए नीचे के जमीन ना चुने व स्थान ऊँचा हो। पेयजल के स्रोत यथा कुआँ, चापानल आदि से सुरक्षित दूरी रखें। कुंआ अथवा चापानल की गहराई यदि 12 मीटर से कम है तो शौचालय के लिचपिट की दूरी पेयजल स्रोत से 15 मीटर तक रखें। पर यदि पेयजल स्रोत की गहराई 12 मीटर से ज्यादा है तो पेयजल स्रोत से लिचपिट की दूरी 10 मीटर तक रखी जा सकती है। लेकिन किसी भी सूरत में लिचपिट पेयजल स्रोत से 10 मीटर की कम दूरी पर ना हो। यदि आसपास कोई बड़ा वृक्ष है तो शौचालय और लिचपिट उससे दूरी पर रखें। घर की दीवार से लिचपिट कम से कम 3 मीटर दूरी पर हो। शौचालय के लिए पथरिली/चट्टान वाली जमीन ना चुने। शौचालय की घर से दूरी परिवार के सभी सदस्यों की सुविधा के अनुकूल हो। घर से शौचालय के मध्य का रास्ता साफ सुथरा अथवा कंकड़, झाड़ी, कांटे इत्यादि से रहित हो। जमीन की नाप लेना स्थान का चयन हो जाने के बाद जमीन पर शौचालय का नक्शा निम्न प्रकार से नाप लेकर बनाते हैं उक्त नक्शा बनाते हुए हमें ध्यान रखना है कि लिचपिट आवश्यक रूप से गोल ही बने चौकोर लिचपिट जमीन का कम दबाव झेलता है। जबकि गोल अधिक दबाव झेलता है। लिचपिट पूर्णरूप से गोल ही बनना चाहिए। यह उसके स्थायित्व और मजबूती के लिए आवश्यक है। नक्शा इसी अनुरूप बनाना चाहिए। यदि मकान मालिक के पास जमीन की कमी है तो भी उसे वाई जंक्शन बॉक्स युक्त शौचालय बनाना चाहिए। ऑन द पिट शौचालय नहीं बनना चाहिए। जगह की कमी होने पर लिचपिट की अन्य वैकल्पिक रचना की जा सकती है। जिसमें दो लिचपिट को समकोण में लिया जा सकता है। सीधी रेखा में लिया जा सकता है। लेकिन ध्यान रखना चाहिए कि दोनों लिचपिट की बीच की दूरी उन दोनों की गहराई जितनी अर्थात् 1 मीटर आवश्यक रूप से होनी चाहिए। बैठने के चबूतरे की खुदाई बैठने के चबूतरे की खुदाई बैठने के चबूतरे का निर्माण बैठने के चबूतरे के निर्माण के लिए सबसे पहले निचले सतह पर 3” बालू, बिछायें ताकि मिट्टी की नमी को सोख लें, इसके बाद चारों तरफ 10” ईंट से 16 मसाला बनाकर चुनाई करें जिससे ईंट के अन्दर के अन्दर की भाग की दूरी चौड़ाई में 31” तथा लम्बाई में 35” हो। 5” ईंट का दूसरा रद्दा लगाएं जिससे अन्दर के भाग की दूरी लम्बाई में 4.” एवं चौ0 में 36” इंच हो इस प्रकार 5” ईंट का तीन रद्दा लगाएं यह अन्तिम रद्दा होगा। एक फिटपूरा जुड़ाई के बाद डी.पी.सी. 1:3:4 के अनुपात में सीमेंट, बालूव स्टोनचिप्स से 1” मोटाई में ढलाई कर दें ताकि नीचे का पानी डी.पी.सी. के ऊपर दीवारों पर पानी का अंश न जाए और पिलिन्थ मजबूत हो। इसके बाद 10” के बाहर चारों तरफ दीवारों को मिट्टी से ढ़क दें। अल पिलिन्थ पर से 5” ईंट का 1:’ मसाला से जुड़ाई तीन तरफ करें, आगे से 6 फिट और पीछे से 5'.6” जुड़ाई पूरा करें आगे जुड़ाई करते समय दाहिने तरफ दीवार से 5” ईंट का जुड़ाई करके कोपला निकालें। साथ-साथ एल टाईप का कलम्पू जाम कर दें, नीचे से ऊपर की ओर ऊपर से नीचे की ओर आठ-आठ इन्च पर जाम कर दें। लिच-पिट का निर्माण :- लिच-पिट के गड्डे को आसानी से खुदाई करने के लिए 2 फिट का एक धागा लें उसके बाद जमीन पर रखकर उसे बीच से अन्दर करके चारों तरफ घुमा दें। आपके गड्डे का माप गोल हो जायेगा, अब गहराई 39”कर दें। लिच-पिट का गड्डा गोल 48” हो जाने के बाद गहराई भी 39” फीता से नाप लें, इसके बाद 5” ईंट का जुड़ाई 1/2 इंच जाली छोड़ते हुए चालू करें निचले रद्दा में 14 मसाला से खाली स्थान को भर दें इस तरह 12 रद्दा ऊपर तक जुड़ाई करें। अन्तिम रद्दा जुड़ाई के बाद 5” के ऊपरी भाग पर मसाले से जाम कर दें। लिच-पिट निर्माण के दौरान इन गलतियों से सदैव बचना चाहिए लिच-पिट का ढक्कन :- लिच पिट के ढक्कन के लिए 6 एम.एम. क्वाईल से गड़े के हिसाब से एक गोलाकार रिंग तैयार कर लें। रिंग की गोलाई के हिसाब से छोटे छड़ को काट कर छहः छहः इंच की देरी पर तार से बांध दें। 1:3:4स्टोन चिप्स मसाला से 39” व्यास गोलाईमें करके 3” इंच मोटाईमें ढलाईकर दें। किनारे से पहला क्वाइल 3” की दूरी पर तथा सभी क्वाइल 6” की दूरी पर लगाया जाना है। जंक्शन बॉक्स के लिए 11’ का 6 एम.एम. छड़ चार काट लें। फिर तार से चित्रानुसार बांधे, अब 1.3:4 स्टोन चिप्स मसाला बनाकर 2’ मोटाई में ढक्कन को ढ़ाल दें। जक्शन बॉक्स ढक्कन जंक्शन बॉक्स - जंक्शन बॉक्स अन्दर-अन्दर 10”x10” का होगा इसके लिए शौचालय में चबूतरे से सटा कर 20” का चौकार मिट्टी काट लेंगे उसमें ईंट के टुकड़े को डालकर धुर्मिस करें, किनारे में 5” का दो रद्दा लगाएंगे तो बीच में 10'x10” की जगह उपलब्ध हो जाएगी। इस जंक्शन बॉक्स को बेहतर ढंग से सीमेन्ट का पन्नी कर दें ताकि मल का जमाव जंक्शन बॉक्स में न हो सके। जंक्शन बॉक्स बनाते समय इसका ढाल इतना हो कि मल पाइप के रास्ते लिच-पिट में आसानी से चला जाए जंक्शन बॉक्स में दो मुँह होगा इसके एक मुँह में 3 इंच मोटाई का प्लास्टिक पाइप लगाकर उसे लिच-पिट में जोड़ देंगे दूसरे मुख को ईंट के टुकड़े से कम मसाला का उपयोग कर बन्द कर देंगे जो पहले लिच-पिट को भर जाने के बाद दूसरा लिच-पिट के लिए उपयोग होगा, पाइप का ढाल पानी डालकर देख लें ताकि मल आसानी से लिच-पिच में जा सके, लिच-पिट में पाइप इस तरह से लगाएं कि लिच-पिट के बीच में जमा हो सकें और उसके बाद जंक्शन बॉक्स को ढक्कन से बन्द कर दें। कमरे की दीवार 5” का पूरा होने के बाद छत पर 3'6” का दो बम्बू (बाँस) का टुकड़ा ईंट के बीचों बीच मसाला से जाम कर दें, इसके बाद चौड़ाई 3'6' और लम्बाई4 फीट सीमेंटेड करकट/जी.आई.सीट (टीना करकट) ऊपर से रखकर उसे पाँच इंच ईट से जुड़ाई दो रद्दा कर दें। कमरे की छत पूरा होने के बाद कमरे के अन्दर साइफन बिठाने के लिए जमीन के अन्दर 13” खुदाई करें, उसके बाद नीचे एक ईंट बिछाएं और उसी पर साइफन को रखें। साइफन रखने के बाद सीमेंट का घोल बनाएँ और उसमें सूती कपड़ा/पटुआ को भिगों दें फिर उस कपड़े पटुआ को साइफन पाइप में घुमा कर लपेट दे उसके बाद पाइप को साइफन से जोड़ दें, इस प्रकार 4” पी.वी.सी. पाइप को ऐसा साइफन से जोड़ें कि जंक्शन बॉक्स की तरफ ढालान हो अब पैन को साइफन पर पीछे की दीवार से 9” दूरी पर बिठायें ध्यान देना है कि अगल-बगल के दोनों दीवारों के बीचों बीच हो पानी डालकर देख लें ढलान सही है या नहीं, पैन हिले नहीं इसके लिए चारों तरफ से ईट या पत्थर के टुकड़े व मिट्टी से जाम कर दें। अब जमीन बनाने के लिए ईंट के चारों तरफ खरंजा/सोलिंग कर दें, इसके बाद पानी का छिड़काव करके छोड़ दें। तब तक जंक्शन बॉवस का काम करें और 4' पी.वी.सी. पाइप जंक्शन बॉक्स में जोड़ते हुए 3” का पाइपगड़े में जाम कर दे, पाइप ऐसा जाम करे कि जंक्शन बॉक्स से गड़े कि ओर ढाल हो ताकि मल आसानी से गड़े में जा गिरे। जंक्शन बॉक्स के अन्दर चारों तरफ प्लास्टर करके सीमेंट का घोल से नहला/पन्ना कर दें। अगले दिन कमरा के अन्दर 1:3:4 (सीमेंट, बालू व स्टोन चिप्स) का मसाला बना कर पैन के लेवल तक ढलाई कर दें। इसके बाद हाफ इंची प्लास्टर कर जमीन को पैन की ओर ढाल करें। पायदान सीट के अगल बगल पैन को पीछे की सतह से आगे कि ओर 5” पर पायदान को बिठाएं। इसके बाद सीमेन्ट का घोल बनाकर नहला/पन्नी अच्छी तरह जमीन पर करके सूती कपड़े से जमीन को पोछ दें। इसके दरवाजा को एक कलम्पू में डालकर उसे खोल-लगाकर देख लें, उसके बाद दरवाजा के पास एक रद्दा जुड़ाई करके सीढ़ी बना दें ताकि चढ़ने उतरने में आराम हो। ध्यान रहे कि नवनिर्मित शौचालय को 5 दिन सुबह-शाम पानी से तराई जरूर करें, ताकि शौचालय मजबूत व टिकाऊ हो। कमरे का कार्य पूरा होने के बाद जंक्शन बॉक्स एवं गड्डे पर ढक्कन चढ़ा दें और सीमेन्ट बालू के मसाला से अच्छी तरह जाम कर दें ताकि अन्दर की गैस व बदबू बाहर ना आ सके। इसके पश्चात् चारों तरफ मिट्टी से ढक दें। अब शौचालय उपयोग के लिए तैयार है। बैठने के चबूतरे के निर्माण में ध्यान रखने योग्य बातें चबूतरे को बाहर जंक्शन चैम्बर बनायें और पाइप से लिच-पिट को जोड़ें तथा चबूतरा की ढाल हमेशा पेन की तरफ हो। जल-बन्द शौचालय बनाते वक्त इसमें 20 मि.मी. वाटर शिल वाला अथवा गोलाकार तल वाला ट्रेप/मुर्गा काम में लिया जाना चाहिए। रूरल पैन बाहर से देखने पर 25 डिग्री ढलान वाली होनी चाहिए। लिच-पिट युक्त शौचालय में गैस अथवा वेन्ट पाईप नहीं लगाना चाहिए। जंक्शन बॉक्स को बनाते ववत चैम्बर का तल ढालान होनी चाहिए तथा चैम्बर को अन्दर से अच्छी तरह से घोटाई कि हुई होनी चाहिए। जंक्शन बॉक्स से लिचपिट तक लगाये जाने वाला पाईप 4 इंच व्यास का होना चाहिए तथा लिचपिट का लेवल जंक्शन बॉक्स के नीचे होना चाहिए अर्थात् जंक्शन बॉक्स एवं लिच-पिट के मध्य पाईप बैठाते समय उचित डालान (1 फिट में सवा इंच का ढालान होना याहिए)। मलवाहक पाईप लिच-पिट के अन्दर अधिकतम 4 इंच अन्दर तक होना चाहिए ताकि मल पिट में गिरे। वाटर सील एवं पैन में लेवल बैठाना चाहिए एवं जोड़ते वक्त पानी डालकर जांच कर लेनी चाहिए। लिच-पिट का तल, जंक्शन बॉक्स, रूरल पैन, वाटर सील एवं पाईप पूर्ण रूप से साफ है उनमें कहीं पर भी मिट्टी, सीमेन्ट अथवा मसाला नहीं रहा है। ढक्कन तथा लिच-पिट की दीवार के बीच का जोड़ ठीक तरह से बन्द हो इसमें कोई भी दरार/रेख नहीं होनी चाहिए। लिच-पिट पर ढ़क्कन बैठाने के बाद उस पर 9-10 इंच मिट्टी भर देनी चाहिए। जिससे भविष्य में कोई वजन आने पर उसके क्षति पहुँचने की संभावना कम रहे। जंक्शन बॉक्स को बन्द करने से पूर्व जिस तरह के लिच-पीट को हमें काम में नहीं लेना है। उस तरफ के मार्ग को ईंट लगाकर बंद कर देना चाहिए। चबूतरे के बाहर 2 ईंट का समानान्तर सीढ़ी बनायें, ताकि चबूतरा पर चढ़ने में सुविधा हो और धूल मिट्टी अंदर न जा सके। दो लिच-पिटका अन्दर दोनों की गहराई के बराबर होना चाहिए अर्थात 3 फिट गहरे दो लिच-पिट की दूरी 3 फिट होनी चाहिए। जलबंध शौचालय बनाते वक्त इसमें 20 मि.ली. मीटर वाटरशिल वाला ट्रेप/मुर्गा काम में लिया जाना चाहिए। स्त्रोत : श्री कृष्णा लोक प्रशासन संस्थान, इन्नोवेशन प्लानिंग मानिटरिंग यूनिट,रांची,झारखंड।