दृष्टिदोष किसी वस्तु को देखने के लिए उस वस्तु से निकली प्रकाश किरणों का दृष्टीपटल पर फोकस हो पाना ज़रूरी है। कभी-कभी ये किरणें दृष्टीपटल के पीछे या सामने फोकस होने लगती हैं। अगर ये किरणें दृष्टीपटल के सामने पहुँचनेके पहिले ही फोकस होने लगती हैं तो व्यक्ति को दूर की चीज़ें देखने में परेशानी होने लगती है। इसे निकट दृष्टिता या मायोपिया कहते हैं। ये छोटी उम्र में ज़्यादा होता है। इसके उलटे अगर ये किरणें दृष्टीपटल के पीछे फोकस होने लगती हैं तो व्यक्ति को पास की चीज़ें देखने में परेशानी होने लगती है। यह स्थिति किसी भी उम्र में हो सकती है। इसे दूर दृष्टिता या हाइपरमेट्रोपिया कहते हैं। चालीस साल से ज़्यादा उम्र के लोगों में पास की चीज़ों को ठीक से न देख पाने की समस्या आम है। इसका कारण लैंस का लचीलापन इस उम्र में कम होना होता है। दृष्टि (नज़र) की जॉंच आँखों के क्लीनिक में डॉक्टर दृष्टि की जॉंच खास उपकरणों से करते हैं। अब पुरानी मशीनों की जगह कम्प्यूटर वाली मशीनें हैं। परन्तु दृष्टि की जॉंच अन्य तरीकों से भी हो सकती है जो आसान भी है और जिनके लिए भारी भरकम उपकरणों की ज़रूरत भी नहीं होती है। स्नेलेन का चार्ट स्नेलेन का चार्ट में अक्षर या बिन्दु ऊपर के नीचे की ओर घटते हुए आकार में बने होते हैं। छ: मीटर की दूरी पर खड़े होकर अगर आप उस लाईन के अक्षर पढ़ पाते हैं जिस पर ६ एम (मीटर) का निशान लगाया है तो आपकी दृष्टि है। दोनों आँखों की दृष्टि अलग-अलग टैस्ट की जानी चाहिए। कुछ लोग छ: मीटर की दूरी से ६ एम लाईन से छोटे प्रिंट भी पढ़ सकते हैं, इस ६/६ का अर्थ है कि इनकी नज़र औसत लोगों की नज़र से बेहतर है। ६/६ सामान्य व औसत दृष्टि है। अगर कोई व्यक्ति ६ मीटर वाली लाईन ठीक से नहीं पढ़ पाता और उससे ऊपर वाली लाईन के अक्षर यानि उससे बड़े अक्षर ही पढ़ पाता है तो इसका अर्थ है कि उसकी नज़र उतनी कमज़ोर है। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति छ: मीटर की दूरी से सिर्फ सबसे ऊपर की लाईन ही पढ़ पाता है जिसपर ६० मीटर का निशान लगाया गया है और उसके नीचे की लाईनों के अक्षर नहीं पढ़ पाता तो उसकी दृष्टि ६/६० है। यह तरीका आसान और आम है। स्कूलों में भी ये चार्ट मिलते है। तुलना के लिए अपनी दृष्टि का इस्तेमाल अगर आपके पास चार्ट न हो तो आप पास और दूर की चीज़ों जैसे दीवार के कैलेण्डर का इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान रहे कि आपकी अपनी नज़र सामान्य हो या अगर कम हो तो चष्मा पहना है। टैस्ट करते समय ध्यान रखें कि व्यक्ति वो चीज़ें आराम से देख पा रहा है जो आप देख पा रहे हैं। कक्षा में आप बच्चों से ब्लैकबोर्ड पर लिखा हुआ पढ़ने को कह सकते हैं। बच्चों में ज्यादातर दृष्टी दोष दूर की चीज़ दिखाई न देने का होता है। वयस्कों में पास की चीज़ों का न देख पाने का दोष ज़्यादा होता है। आप इसकी जॉंच उन्हें सूई में धागा डालने को कह कर या कोई किताब या अखबार पढ़वाकर या चावल या दाल बिनवाकर कर सकते हैं। उँगलियॉं गिनने का टेस्ट कुछ लोगों की दृष्टि इतनी कमज़ोर होती है कि उसकी जॉंच ऊपर दिए किसी भी तरीके से नहीं हो सकती। इनके लिये आपको उँगलियॉं गिनने के तरीके का इस्तेमाल करना पड़ेगा। आप व्यक्ति की समस्या का अन्दाज़ा पास व दूर से यह टैस्ट करके लगा सकते हैं। इस टैस्ट से यह पता चल सकता है कि व्यक्ति देख भी पाता है या नहीं। अगर किसी को रोशनी भी दिखाई नहीं देती है तो इस समस्या को डॉक्टर भी कुछ नहीं कर सकते। इसका दोष दृष्टीपटल या नेत्र तंत्रिका में ही होगा। रंग देखने की क्षमता रंग देखने की क्षमता की जॉंच हम खास तरह के रंगों के चार्ट द्वारा कर सकते हैं। यह चित्र अलग अलग रंगों के दानों से बने होते हैं। रंगों को ठीक से न पहचान पाने की क्षमता को कलर ब्लॉंइडनैस(रंगांधता) कहते हैं। यह बहुत आम समस्या नहीं है। पर इसका टैस्ट गाडी चलाने के लिए ज़रूरी है। बच्चों में नजर की कमजोरी स्कूली उम्र के बच्चों में आम समस्या दूर की चीज़ें ठीक से न देख पाने (मायोपिया) की होती है। दृष्टीदोष पहचानने के लिये नीचे दी गई शिकायतों पर ध्यान दें। बच्चा ब्लैक बोर्ड नहीं देख पाता है। (कई बार ऐसे बच्चे को उनके अध्यापक पढ ना पाने के कारण डॉंटते रहते हैं)। भैंगापन बच्चा अक्सर अपनी आँख मलता रहता है। बच्चा किताब आँख के बहुत पास रख कर पढ़ता है। पास की चीज़ें साफ न देख पाने की समस्या भी बच्चों में हो सकती है। हालॉंकि यह मायोपिया की तुलना में काफी कम होती हैं। जिन बच्चों में विटामिन ए की कमी होती है उनमें रतौंधी की समस्या भी हो सकती है। हमें बच्चों में इन समस्याओं की जॉंच के लिए खास कोशिशें करनी चाहिए। ईलाज में देरी से नज़र को और नुकसान हो सकता है। स्कूल के बच्चों की नियमित जॉंच होनी चाहिए। स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी कुछ मुद्दों की जॉंच कर सकते हैं। वयस्कों में दृष्टीदोष चालीस उम्र के बाद पास की चीज़ें साफ न देख पाने या पढ़ने में मुश्किल होना आम बात है। इसे दूरदृष्टि दोष कहते हैं। इसके लक्षण हैं सिर में दर्द होना, नींद सी आना, बारीकीवाला काम करने में ध्यान न लग पाना। पढ़ना एक ऐसी ही क्रिया है। कई औरतों को पास की नज़र कमज़ोर होने पर दाल चावल में से कंकड़ निकालने या सूई में धागा पिरोने में दिक्कत होने लगती है। ऐसे सभी लोग चीज़ों को दूर रखकर देखने की कोशिश करते हैं। यह समस्या आसानी से सुधारी जा सकती हैं। पर नज़र की कमज़ोरी (जिसे नम्बर से नापा जाता है,) पहले बढ़ती जाती है और फिर स्थिर हो जाती है। नज़र की कमज़ोरी के सुधार के लिए चश्मे या कॉनटेक्ट लैंस की ज़रूरत होती है। आजकल इसके कई नमूने उपलब्ध है। कॉन्टेक्ट लेंस प्लास्टिक का एक छोटा टुकडा है जो कॉर्निया पर लगा सकते है। वयस्कों में, बूढे लोगों में मोतियाबिन्द व सबलवाय (ग्लूकोमा) की समस्या भी हो जाती है। रतौंधी विटामिन ए विटामिन ए आँखों के ठीक ढ़ंग से काम करने के लिए ज़रूरी है। बच्चे विटामिन ए की कमी से बहुत जल्दी प्रभावित हो जातेहैं। हमें कॉर्निया और दृष्टीपटल के स्वास्थ्य के लिए विटामिन ए की ज़रूरत होती है। हरी सब्ज़ियों, पीले और लाल फलों (पपीते और आम),गाजर, और कलेजी में काफी सारा विटामिन ए होता है। संजने की फली में खूब सारा विटामिन ए होता है और ये फलियॉं लगभग सभी जगह मिलती हैं। रतौंधी यानि रात में ठीक से दिखाई न देना विटामिन ए की कमी का एक सबसे पहला लक्षण होता है। व्यक्ति कम रोशनी में चलते हुए लड़खड़ाता है और रूक-रूक कर चलता है। विटामिन ए की कमी से श्वेतपटल पर मोम जैसे सफेद दाग बन जाता हैं। इन्हें बिटोट दाग कहते हैं। विटामिन ए की कमी से कार्निया सूख जाता है, उसमें झुर्रियॉं पड़ जाती हैं, अलसर हो जाते हैं और वह अपारदर्शी हो जाता है। विटामिन ए की आपूर्ति एक से छ: साल की उम्र तक विटामिन ए की छ: महीने की खुराक (दो लाख यूनिट) दिया जाना अन्धेपन की रोकथाम के कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विटामिन ए की आपूर्ति से कई तरह के संक्रमण से होने वाली मौतों से बच्चों को बचाया जा सकता है। तेल में घुलने वाला विटामिन होने के कारण यह काफी लम्बे समय तक शरीर का वसा में रह सकता है। स्त्रोत: भारत स्वास्थ्य