राष्ट्रीय स्वापक औषधि एवं मन-प्रभावी पदार्थ नीति-प्रस्तावना स्वापक औषधियों और मन-प्रभावी पदार्थों का चिकित्सा और वैज्ञानिक क्षेत्रों में कई प्रकार से प्रयोग किया जाता है। हालाकि, इनका दुरुपयोग हो सकता है और हो भी रहा है तथा इनका अवैध व्यापार भी हो रहा है। स्वापक औषधियों और मन-प्रभावी पदार्थों पर भारत के दृष्टिकोण को भारत के संविधान के अनुच्छेद 47 में दर्शाया गया है जिसमें कहा गया है कि राज्य नशीले पेयों और दवाओं,जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, के प्रयोग पर केवल चिकित्सा संबंधी उद्देश्यों को छोड़कर प्रतिबंध लगाने का प्रयास करेगा। चिकित्सा उद्देश्यों को छोड़कर, नशीली दवाओं के प्रयोग को रोकने के लिए इसी सिद्धांत को नशीली दवाओं से संबंधित तीन अंतर्राष्ट्रीय कन्वेशनों यथा सिंगल कन्वेंशन आन नार्कोटिक ड्रग्स, 1961 कन्वेंशन आन साइकोट्रापिक सब्स्टैन्सेस, 1971 और यू एन कन्वेंशन एगेन्स्ट इल्लिसिट ट्रैफिक इन नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रापिक सप्सटैन्सेस 1988 में भी अपनाया गया। भारत ने इन तीनों कन्वेंशनों पर हस्ताक्षर किया है और इनको अभिपष्ट भी कर दिया है। इन तीन कन्वेंशनों के लागू होने के पहले से ही भारत ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग और उसके व्यापार को रोकने के लिए अपनी कटिबद्धता प्रकट की है। स्वापक औषधि और मन-प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) 1985 को संयुक्त राष्ट्र के नशीले पदार्थों से संबंधित कन्वेंशनों और उपर्युक्त पैरा 1 में उल्लिखित भारत के संविधान के अनुच्छेद 47 के प्रति भारत के दायित्वों और कर्तव्यों को मद्दे नजर रखते हुए तैयार किया गया है। इस अधिनियम के द्वारा चिकित्सा और वैज्ञानिक उद्देश्य को छोड़कर अन्य किसी उद्देश्य के लिये नशीली दवाओं और स्वापक पदार्थों के विनिर्माण, उत्पादन, व्यापार प्रयोग, आदि पर रोक लगा दी गई है। सरकार की नीति इस तरह से बनाई गई है कि इन दवाओं और पदार्थों का प्रयोग चिकित्सा और वैज्ञानिक प्रयोग के लिये हो और इनका कानूनी स्रोत से विपथन न हो सके और इसके अवैध व्यापार और दुरुपयोग को रोका जा सके। पहले के अफीम अधिनियम और घातक औषधि अधिनियम, जिनके स्थान पर यह आया है, के विपरीत एनडीपीएस एक्ट से विभिन्न केन्द्रीय और राज्य विधि विभिन्न जिनके जा सके। प्रवर्तन एजेंसियां को प्रवर्तन शक्तियों प्राप्त हो गई हैं। इस प्रकार कानून का दायरा बहुत दूर-दूर तक बढ़ गया है। एनडीपीएस एक्ट से केन्द्र और राज्य सरकारों के लिए यह संभव हो गया है कि वे किसी भी विभाग के नये वर्ग के अधिकारियों को अधिसूचित कर सकती है ताकि वे इस विधि को प्रवर्तित कर सकें। स्वापक औषधि और मन-प्रभावी पदार्थ अधिनियम ने वैध क्रियाकलापों को विनियमित करने से संबंधित शक्तियों और जिम्मेदारियों को विभाजित कर दिया है। इस अधिनियम की धारा 9 में ऐसे कई क्रियाकलापों की सूची तैयार की गई है। जिन पर राज्य सरकारें कानून बना सकती हैं और उनको विनियमित कर सकती हैं। इस प्रकार हमारे यहां केन्द्र सरकार का अपना एनडीपीएस नियमावली है और इस अधिनियम के अंतर्गत राज्य सरकारों ने अपने-अपने एनडीपीएस नियमावली बनाई है। इनका प्रवर्तन केन्द्र सरकार और संबंधित राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। स्वापक औषधि और मन -प्रभावी पदार्थ अधिनियम के अंतर्गत वैज्ञानिक प्राधिकारियों का सृजन किया गया है जैसे कि स्वापक आयुक्त (धारा 5), सक्षम प्राधिकारी (धारा 68 घ) और प्रशासक (धारा 68 छ)। स्वापक आयुक्त जिस संगठन का प्रमुख होता है उसे केन्द्रीय स्वापक ब्यूरो के नाम से जाना जाता है। एक दूसरा प्राधिकरण जिसे स्वापक नियंत्रण ब्यूरो कहा जाता है का सृजन इस अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत जारी अधिसूचना के तहत् किया गया है। एलोकेशन आफ बिजनेस रुल्स के अनुसार सरकारी कार्य को केन्द्र सरकार में विभाजित किया गया है। इन नियमों के अनुसार स्वापक औषधि और मन -प्रभावी पदार्थ अधिनियम का प्रवर्तन वित्त मंत्रालय, राजस्व विभाग के द्वारा किया जाता है। हालाकि ड्रग डिमांड रिडक्शन से संबंधित मामले को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया जाता है। भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय जिसपर स्वास्थ्य संबंधी सभी प्रकार के मुद्दों की जिम्मेदारी है, देश भर के सभी सरकारी अस्पतालों में कई नशा मुक्ति केन्द्र चला रहा है। गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला स्वापक नियंत्रण ब्यूरो एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत आने वाले विभिन्न कार्यालयों (केन्द्र और राज्य) में समन्वय स्थापित करता है। राज्य सरकारों के भी अपने-अपने स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक कल्याण विभाग हैं। जिनमें प्रत्येक के अपने-अपने क्रियाकलाप हैं जो कि नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने से संबंधित है। नीति की आवश्यकता जैसा कि ऊपर चर्चा की गई है, केन्द्र और राज्य सरकारों के कई विभाग और संगठन स्वापक औषधि और मन -प्रभावी पदार्थ से संबंधित विभिन्न क्रियाकलापों में संलग्न हैं। इनमें से कुछ को नीचे सूची में दिया गया है- क्र.सं. कार्य सरकार/विभाग/संगठन 1 नशीली दवाओं से संबंधित विधियों का प्रवर्तन केन्द्र सरकार 1. स्वापक नियंत्रण ब्यूरो 2. केन्द्रीय स्वापक ब्यूरो । 3. राजस्व आसूचना महानिदेशालय 4. सीमा शुल्क आयुक्तालय 5. केन्द्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्तालय 6. तटरक्षक दल राज्य सरकारें राज्य दर राज्य भिन्न, समान्यतया 1. राज्य पुलिस 2. राज्य उत्पाद शुल्क अधिकारी 2 अफीम और मांग की अवैध फसलों का पता लगाना और उनको नष्ट करना संदिग्ध क्षेत्रों का उपग्रह से सर्वेक्षण केन्द्रीय आर्थिक आसूचना ब्यूरो (सीईआईबी) एनसीबी और सीबीएन का सर्वेक्षण करता है और उसके साथ जानकारी का आदान-प्रदान करता है। केन्द्र सरकार 1. स्वापक नियंत्रण ब्यूरो गृह मंत्रालय, भारत सरकार 2. स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, ग्वालियर, राजस्व विभाग, भारत सरकार राज्य सरकारें राज्य दर राज्य भिन्न भिन्न सामान्यतया 1. राज्य पुलिस 2. राज्य पुलिस अधिकारी 3 एनडीपीएस एक्ट, 1985 की धारा 9 में उल्लिखित विभिन्न क्रियाकलापों को विनियमित करने के लिए नियम बनाना राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार 4 एनडीपीएस एक्ट, 1985 की धारा 9 में उल्लिखित विभिन्न कियाकलापों को विनियमित करने के लिए नियम बनाना राज्य सरकारें 5 अफीम पापी की खेती के लिए लाइसेंस देना और उसका निरीक्षण करना केन्द्रीय स्वापक ब्यूरो, ग्वालियर 6 नशीली औषधियों के विनिर्माण के लिये लाइसेंस प्रदान करना केन्द्रीय स्वापक ब्यूरो, ग्वालियर 7 अफीम को सूखाना और उसका निर्यात करना मुख्य कारखाना नियंत्रक, नई दिल्ली 8. अफीम से उसके अलकलायड का निष्कर्षण। मुख्य कारखाना-नियंत्रक, नई दिल्ली 9. अफीम के अल्कलायड का आयात मुख्य कारखाना- नियंत्रण, नई दिल्ली 10. नशीली दवाओं का आई एन सी बी द्वारा लगाये गये अनुमान का आवंटन और उसके बाद उसकी मानीटरिंग केन्द्रीय स्वापक ब्यूरो, ग्वालियर 11. परीक्षण प्रयोगशालाओं, प्रशिक्षण संस्थानों, आदि को नशीली औषधियों के नमूनों की आपूर्ति मुख्य कारखाना-नियंत्रक, नई दिल्ली 12. नशीली औषधियों की बिक्री, प्रयोग, उपभोग आवा-गमन पर नियंत्रण राज्य सरकारें, सामान्यतया अपने अपने राज्य उत्पाद शुल्क विभागों के माध्यम से 13. स्वापक औषधियों और मन -प्रभावी पदार्थों तथा पूर्ववर्ती पदार्थों के आयात और निर्यात पर नियंत्रण केन्द्रीय स्वापक ब्यूरो, ग्वालियर 14. पोस्त बीज के आयात अनुबंध का पंजीकरण केन्द्रीय स्वापक ब्यूरो, ग्वालियर 15. मन -प्रभावी पदार्थों के विनिर्माण, व्यापार आदि का विनियमन ड्रग्स एंड कास्मेटिक एक्ट एंड रुल्स के साथ पठित एनडीपीएस रुल्स के अंतर्गत आने वाले राज्य औषधि नियंत्रक/स्वापक नियंत्रक, आयात और निर्यात | 16. एनडीपीएस (रेग्यूलेशन आफ कन्ट्रोल्ड सब्स्टैन्सेस) आईर, 1993 के अंतर्गत नियंत्रित पदार्थों से संबंधित रिटर्न की प्राप्ति और उसकी मानीटरिंग | स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, गृह मंत्रालय, भारत सरकार 17. नियंत्रित डिलीवरी प्रक्रिया महानिदेशक स्वापक नियंत्रण ब्यूरो 18. नशीली दवाओं के व्यापारियों उनके सगे संबंधियों साथियों की सम्पत्ति की जब्ती, कुर्की एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत नियुक्त सक्षम प्राधिकारी (इस समय दिल्ली, चेन्नै, मुम्बई और कोलकाता में) 19. जब्त कुर्क सम्पति का प्रबंधन एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत नियुक्त प्रशासक (इस समय दिल्ली, चेन्नै मुम्बई और कोलकाता में) 20. नशेड़ियों को अफीम की आपूर्ति राज्य सरकारें, सामान्यतया अपने राज्य उत्पाद शुल्क विभागों के माध्यम से 21. पोस्त भूस का विनियमन राज्य सरकारें, राजस्व विभाग भारत सरकार के दिनांक 30 नवम्बर, 2009 के दिशा-निर्देशों के अनुसार 22. नशेड़ियों की नशाखोरी छुड़ाने और उनके पुनर्वास में लगे गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से चलाया जाना वाला ड्रग डिमांड रिडक्शन सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार 23. ड्रग डिमांड रिडक्शन में गैर सरकारी संगठनों के कर्मचारियों को प्रशिक्षण सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला राष्ट्रीय सामाजिक अभिरक्षा संस्थान 24. निवारक शिक्षा सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय 25. सरकारी अस्पतालों के माध्यम से नशेड़ियों का उपचार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार 26. ड्रग डिमांड रिडक्शन के कार्य में डाक्टरों को प्रशिक्षण नेशनल ड्रग डिपेन्डेन्स ट्रीटमेंट ट्रेनिंग सेन्टर, एम्स, नई दिल्ली 27. राज्य स्तर पर नशीली दवाओं की मांग में कमी राज्यों के सामाजिक कल्याण विभाग 28. राज्यों के सरकारी अस्पतालों के माध्यम से चलने वाला ड्रग डिमांड रिडक्शन क्रियाकलाप राज्यों के स्वास्थ्य विभाग 29. पकड़े गये दवा नमूनों का परीक्षण 1. केन्द्रीय राजस्व नियंत्रक प्रयोगशाला 2. लेबोरेटरीज आफ गवर्नमेंट ओपीयम एंड एल्कलायड्स वर्क्स (जीओएडब्लू) 3. केन्द्रीय विधि चिकित्सा विज्ञान प्रयोगशाला 4. विभिन्न राज्यों की राजकीय विधि चिकित्सा विज्ञान प्रयोगशालायें 30. नशीली दवाओं से संबंधित विधियों के प्रवर्तन में कर्मचारियों को प्रशिक्षण 1. राष्ट्रीय सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और स्वापक अकादमी 2. राष्ट्रीय पुलिस अकादमी 3. राज्य प्रशिक्षण स्कूल 4. राष्ट्रीय अपराध शास्त्र और विधि चिकित्सा विज्ञान संस्थान 5. सी आर सी एल 6. स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) 31. अंतर्राष्ट्रीय स्वापक नियंत्रण ब्यूरो और स्वापक औषधि आयोग में रिटर्न भरना स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, गृह मंत्रालय, भारत सरकार 32. विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई जब्ती की सांख्यिकी तैयार करना। स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, गृह मंत्रालय, भारत सरकार 33. नशीली दवाओं और उसके पूर्ववर्ती पदार्थों के आयात और निर्यात के बारे में अन्य देशों के प्राधिकारियों साथ और आईएनसीबी के साथ ताजा जानकारी का आदान प्रदान | केन्द्रीय स्वापक ब्यूरो, ग्वालियर 34. कैंसर/दर्द से राहत प्रदान करने और प्रशामक उपचार के लिए मार्फीन/ओपिआयड उपलब्ध कराना स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, राज्यों के स्वास्थ्य विभाग राजकीय औषधि नियंत्रक और मुख्य कारखाना नियंत्रक उपर्युक्त प्रत्येक संगठनों में भारी संख्य में कर्मचारी मौजूद हैं और यहां तक कि राजकीय पुलिस जैसे संस्थानों के पास तो हजारों कर्मचारी हैं। कुछ अन्य संगठन, जिनमें कुछ का एनडीपीएस एक्ट में प्रत्यक्ष भूमिका न होने पर भी, नशीली दवाओं के व्यापार और प्रयोग की समस्या से नजदीकी से जुड़े है। उदाहरण के तौर पर, जेल के कर्मचारियों को नशेड़ियों की समस्या से उलझना पड़ता है क्योंकि नशे की लत सामान्य लोगों की अपेक्षा कैदियों में ज्यादा होती है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन जो कि केवल एड्स से संबंधित है, को सूई के माध्यम से नशीली दवाओं का सेवन करने वालों में एचआईवी के फैलने की समस्या से जूझना होता है। ऐसे भी कई मुद्दे और हैं जिनपर देश में एक समान नीति नहीं बनी है। उदाहरणार्थ सूईयों के माध्यम से नशीली दवाओं का प्रयोग करने वालों (आईडीयू) (यानी ऐसे लोग जो घूम्रपान, सूंघने या मुंह से खाने के बजाय इंजेक्शन से नशीली दवा लेते हैं) प्राय - आपस में सूइयों और सिरिंज का आदान प्रदान करते हैं। इनमें से यदि एक को एचआईवी हो तो बाकी लोगों में इन सूइयों और सिरिंज के माध्यम से यह रोग फैला देता है। इन सूई के माध्यम से नशीली दवाओं का प्रयोग करने वालों से निपटने के लिए दो ही रास्ते हैं- नुकसान को कम करना या इससे दूर रहना। जहां तक नुकसान को कम करने की बात है नशेड़ियों को साफ सूई और सिरिंज देकर कहा जा सकता है कि वे इसका प्रयोग सफाई पूर्वक करें (जिससे कि वे सूई और सिरिंज का आदान प्रदान न करें) इसके अलावा उनको बूप्रेनार्फीन या मेथाडोन की गोलियां देना (जिससे कि वे हेरोइन का इन्जेक्शन न लगाये, वे बूप्रेनार्कोन या मेथाडोन को मुंह से खा सकते है)। इनसे दूर रहने का दृष्टिकोण यह है कि एचआइवी को रोकने के लिए नशे से दूर रहने के लिए कह जा सकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन जैसे देश इसी दूर रहने की नीति को अपनाते हैं जबकि यूरोपीय समुदाय और आस्ट्रेलिया जैसे देश हानि को कम करने के दृष्टिकोण को अपना रहे हैं, सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय ने अब तक दूर रहने की नीति का पालन किया है जबकि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन नुकसान को कम करने की नीति को बढ़ावा दे रहे हैं। नीतिगत दस्तावेजों का उद्देश्य अन्य बातों के साथ-साथ, इसी प्रकार के भटकाव और इनसे संबंधित मुद्दों का समाधान करना है। नीति के उद्देश्य एनडीपीएस पर राष्ट्रीय नीति तैयार कर ली गई है और ऐसा करने में। संबंधित मंत्रालयों संगठनों और राज्य सरकारों से परामर्श भी किया गया है। इस नीति के उद्देश्य हैं- (क) स्वापक औषधियों और मन -प्रभावी पदार्थों पर भारत की नीति तैयार करना (ख) भारत के मंत्रालयों और संगठनों को तथा राज्य सरकारों को साथ ही साथ अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, गैर सरकारी संगठनों आदि का मार्गदर्शन करना (ग) नशीली दवाओं के खतरे का समग्र तरीके से समाधान करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दुहराना स्रोत: राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार