परिचय भारतीय चिकित्सा परिषद् के भारतीय चिकित्सा परिषद् (व्यवसायिक आचरण, शिष्टाचार नीति)विनियमावली, 2002 की ओर ध्यान आकर्षित किया जाता है। किसी पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनर के किसी कदाचार पर कार्यवाई करने के लिए, उक्त विनियमावली में निम्नलिखित कार्य प्रणाली का उल्लेख है। कार्यवाई की प्रक्रिया पंजीकृत भारतीय चिकिस्ता परिषद् के अंतर्गत किसी चिकित्सा प्रैक्टिशनर द्वारा किसी व्यवसायिक कदाचार के मामले में जांच प्रारंभ करने और कार्यवाई करने के लिए अपीलकर्ता सम्बंधित राज्य चिकित्सा परिषद् को शिकायत कर सकता है। शिकायत प्राप्त होने पर राज्य चिकित्सा परिषद् एक जांच आयोजित करेगी और प्रतिवादी/अधिवक्ता को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देगी। दोषी चिकित्सक के विरुद्ध शिकायत पर निर्णय 6 महीने की समय-सीमा में लिया जायेगा। शिकायत के लंबित रहने के दौरान, राज्य चिकित्सा परिषद्/आईएमसी दोषी चिकित्सक प्रक्रिया, जिसकी जान्च्ग चल रही है, का निष्पादन करने पर पाबन्दी लगा सकती है। यदि चिकित्सा प्रैक्टिशनर व्यवसायिक कदाचार का दोषी पाया जाता है तो सम्बंधित राज्य चिकित्सा परिषद् दोषी चिकित्सक को विनियम के अनुसार दंड दे सकती है। जहाँ भारतीय चिकित्सा परिषद् को सूचित किया जाता है कि राज्य चिकित्सा परिषद् द्वारा दोषी चिकित्सक के विरुद्ध किसी शिकायत पर उसे प्राप्त होने की तारिख से 6 महीनों की अवधि के अन्दर निर्णय नहीं लिया गया है, तो एमसीआई सम्बंधित राज्य सरकार को शिकायत को एक समयबद्ध सीमा में निराकरण करने और उस पर निर्णय लेने के लिए कह सकेगी अथवा सम्बंधित राज्य चिकित्सा परिषद् में लंबित उक्त शिकायत को सीधे एमसीआई द्वारा निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद स्वयं सीधे वापस लेने का निर्णय ले सकती है और इसे परिषद् की नीति समिति को भारतीय चिकित्सा परिषद् के कार्यालय में शिकायत प्राप्त होने की तारिख से अधिकतम 6 महीनों की अवधि के अन्दर शीग्र निपटन के लिए भेजेगी। किसी दोषी चिकित्सक के विरुद्ध किसी शिकायत पर राज्य चिकित्सा परिषद् के निर्णय द्वारा प्रभावित व्यक्ति को, उप चिकित्सा परिषद् द्वारा पारित आदेश के प्राप्त होने की तारीख से 60 दिनों की अवधि के अन्दर एमसीआई को अपील करने का अधिकार होगा। किन्तु, एमसीआई, यदि स्वयं संतुष्ट हो कि अपीलकर्ता को पर्याप्त कारणों से 60 दिनों की अवधि के अन्दर अपील प्रस्तुत करने से रोका गया था तो उसे अन्य 60 दिनों की अवधि के अंदर अपील करने की अनुमति दे सकेगी। स्त्रोत: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग