आयुष सेवाओं का उद्देश्य आयुष सेवाओं का मुख्य उद्देश्य आयुष अस्पतालों एवं औषधालयों के उन्नयन, सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों में आयुष सेवाओं का सहस्थापन और 50 बिस्तर तक एकीकृत आयुष अस्पतालों की स्थापना के जरिए आयुष के मुख्य सक्षम क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करके लागत प्रभावी आयुष सेवाओं के माध्यम से स्वास्थ्य परिचर्या प्रणाली के क्षेत्र विस्तार में वृद्धि करना है। राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत आयुष सेवाओं के घटक राज्य/संघ राज्य सरकारों से निम्नलिखित के लिए सहायतानुदान प्रदान किया जाएगा- मुख्य/आवश्यक कार्यकलाप सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों में आयुष सेवाओं की सह-स्थापना। मौजूदा सरकारी आयुष अस्पतालों का उन्नयन मौजूदा सरकारी/पंचायत/सरकारी सहायता प्राप्त आयुष औषधालयों का उन्नयन 50 बिस्तर तक एकीकृत आयुष अस्पतालों की स्थापना केंद्रीय और राज्य स्तर पर कार्यक्रम प्रबंधन एकांशों जैसी सहायक सुविधाएं। आयुष अस्पतालों एवं औषधालयों को आवश्यक औषधों की आपूर्ति सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने संबंधी कार्यकलाप राज्य और जिला स्तर पर चल सहायता व्यवहार परिवर्तन संचार/सूचना शिक्षा और संचार स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम नम्य पल के अंतर्गत कार्यकलाप योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सहित आयुष स्वास्थ्य केंद्र टेली मेडिसिन आयुष के माध्यम से खेल चिकित्सा सार्वजनिक निजी भागीदारी सहित आयुष को मुख्यधारा में लाने पर नवाचार मुख्य/आवश्यक कार्यकलाप सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों में आयुष सेवाओं को सह-स्थापना (क) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आयुष ओपीडी क्लीनिकों की स्थापना i एक मुश्त अनुदान- मौजूदा परिसर, फर्नीचर, उपस्कर, उपकरणों आदि के विस्तार/परिवर्तन के लिए 2000 लाख रुपये तक, बशर्ते मौजूदा परिसर के विस्तार/परिवर्तन पर व्यय कुल राशि का 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। ii आवर्ती अनुदान - एकमुश्त आकस्मिक निधि के रूप में 0.30 लाख रुपये प्रति वर्ष। औषधों, औषधियों, आहार और अन्य उपभोज्य पदार्थों के प्रापण के लिए 3.00 लाख रुपये प्रति वर्ष। (ख) सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में आयुष आईपीडी की स्थापना i एक मुश्त अनुदान - मौजूदा परिसर, फर्नीचर, उपस्कर, उपकरणों आदि के विस्तार/परिवर्तन के लिए 3000 लाख रुपये तक, बशर्तें मौजूदा परिसर के विस्तार/परिवर्तन पर व्यय कुल संस्वीकृत राशि का 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। ii आवर्ती अनुदान एकमुश्त आकस्मिक निधि के रूप में 0.50 लाख रुपये प्रति वर्ष -औषधों, औषधियों, आहार और अन्य उपभोज्य पदार्थों के प्रापण के लिए 5.00 लाख रुपाये प्रति वर्ष।। I (ग) जिला अस्पतालों में आयुष स्कंधों की स्थापना i एक मुश्त अनुदान - मौजूदा परिसर, फर्नीचर, उपस्कर, उपकरणों आदि के विस्तार/परिवर्तन के लिए 40.00 लाख रुपये तक, बशर्तें मौजूदा परिसर के विस्तार/परिवर्तन पर व्यय कुल राशि का 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। ii आवर्ती अनुदान - एकमुश्त आकस्मिक निधि के रूप में 0.70 लाख रुपये प्रति वर्ष। औषधों, औषधियों, आहार और अन्य उपभोज्य पदार्थों के प्रापण के लिए 5.00 लाख रुपये प्रति वर्ष। आयुष अस्पतालों और औषधालयों को आवश्यक औषधों की आपूर्ति आवश्यक औषधों (आयुर्वेद/सिद्ध/यूनानी) के लिए 200 लाख रुपये प्रति वर्ष। आवश्यक औषधों (होम्योपैथी) के लिए 1.00 लाख रुपये प्रति वर्ष। उत्कृष्ट/एकमात्र सरकारी अस्पतालों का उन्नयन (पीएचसी/सीएचसी/डीएच को छोड़कर) राज्य सरकार,जिला परिषद के अधीन मौजूदा आयुष अस्पतालों के उन्नयन और सुधार के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। i. एक मुश्त अनुदान - मौजूदा परिसर, फर्नीचर, उपस्कर, उपकरणों आदि के निर्माण, नवीकरण के लिए 75.00 लाख रुपये तक, बशर्ते मौजूदा परिसर के विस्तार/परिवर्तन पर व्यय कुल राशि का 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। ii आवर्ती अनुदान (प्रतिवर्ष)- एकमुश्त आकस्मिक निधि के रूप में 0.70 लाख रुपये प्रति वर्ष। औषधों, औषधियों, आहार और अन्य उपभोज्य पदार्थों के प्रापण के लिए 4.50 लाख रुपये प्रति वर्ष iii राज्य निम्नलिखित कार्मिकों को अपनी आवश्यकता के अनुसार संलग्न कर सकता है और स्थानीय मानदंडों के अनुसार वेतन दिया जा सकता है- क. स्नातकोत्तर अर्हता वाले आयुष विशेषज्ञ - 2 (दो) ख. आयुष चिकित्सा अधिकारी-1 (एक) ग. आयुष फार्मासिस्ट - 2 (दो) घ. अर्द्ध चिकित्सा स्टॉफ-मालिश वाला-2 (दो), ङ. क्षार सूत्र सहचर-1/ स्त्री रोग सहचर-1/इलाज-बिद-तदबीर सहचर/थोक्कनाम सहचर-1/होम्योपैथी सहचर-1/योग सहचर-1 iv बशर्त पहले से कार्यरत कार्मिकों को ध्यान में रखकर अतिरिक्त कार्मिकों की आवश्यकता का आकलन और अनुमान किया जाएगा। सभी नियुक्तियां संविदात्मक आधार पर होंगी और केंद्रीय सरकार का दायित्व मिशन अवधि के त्रिए वेतन शीर्ष पर प्रशासनिक और प्रबंधन लागत के लिए स्वीकार्य केंद्रीय योगदान तक ही सीमित होगा। सरकारी/पंचायत/सरकारी सहायता प्राप्त आयुष औषधालयों का उन्नयन i एक मुश्त अनुदान मौजूदा परिसर, फर्नीचर, उपस्कर, उपकरणों आदि के निर्माण, नवीकरण के लिए 2000 लाख रुपये तक, बशर्ते मौजूदा परिसर के विस्तार/परिवर्तन पर व्यय कुल राशि का 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। ii आवर्ती अनुदान (प्रतिवर्ष) एकमुश्त आकस्मिक निधि के रूप में 0.10 लाख रुपये प्रति वर्ष 50 बिस्तर तक एकीकृत आयुष अस्पतालों की स्थापना i एक मुश्त अनुदान स्टाफ क्वार्टर, फर्नीचर, उपस्कर, उपकरणों आदि के लिए एकमुश्त प्रावधान सहित निर्माण के लिए 900.00 लाख रुपये तक, बशर्तें मौजूदा परिसर के विस्तार/परिवर्तन पर व्यय कुल राशि का 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। ii आवर्ती अनुदान (प्रतिवर्ष) औषधियों, औषधों और अन्य उपभोज्य पदार्थों के लिए 30.00 लाख रुपये प्रति वर्ष वेतन के लिए 120.00 लाख रुपये प्रति वर्ष iii जनशक्ति और अवसंरचना संबंधी आवश्यकताएं विस्तृत दिशा निर्देश के संलग्नक- IV में दी गई हैं। iv जनशक्ति की नियुक्ति पहले से कार्यरत कार्मिकों को ध्यान में रखकर अतिरिक्त कार्मिकों की आवश्यकता के आकलन और अनुमान के अधीन होगी। सभी नियुक्तियां संविदात्मक आधार पर होंगी और केंट्रीय सरकार का दायित्व मिशन अवधि के लिए वेतन शीर्ष पर स्वीकार्य केंट्रीय योगदान तक ही सीमित होगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने संबंधी कार्यकलाप i. पोषण संबंधी कमियों, महामारी और वेक्टरजनित रोगों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिचर्या आदि से होने वाली सामुदायिक स्वास्थ्य समस्याओं के निपटान में आयुष शक्तियों के संबंध में जागरुकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने का प्रस्ताव है। इस घटक का उद्देश्य औषधियों के वितरण, स्वास्थ्य जागरुकता शिविरों आदि के आयोजन दवारा जनसंख्या की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार के लिए प्रामाणिक आयुष उपचारों के क्रियान्वयन और साथ ही आयुष विभाग के अभिनिर्धारित राष्ट्रीय अभियानों जैसे जरा-चिकित्सा अभियान, रक्ताल्पता रोधी अभियान आदि के लिए राज्य सरकार के उपायों को सहायतानुदान प्रदान करना है। यह भी प्रस्ताव है कि जहां आयुष एकांश उपलब्ध हैं वहां आयुष शैक्षणिक संस्थानों, एकमात्र आयुष सुविधाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को संबद्ध किया जाए ताकि सतत रूप में गैर-सरकारी संगठनों दवारा संदर्भित समाज के स्वास्थ्य पहलुओं से निपटने के लिए एक संदर्भ तंत्र बनाया जा सके। ii उद्देश्य क. विशिष्ट निर्धारित समयावधि के दौरान चायनित 3भौगोत्रिक क्षेत्र में संचारी अथवा गैर-संचारी या दोनों तरह के मामलों में रोग अधिभार की घटनाओं को कम करना। ख. क्षेत्र में आयुष चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से स्वच्छता, आहार आदतों, रोकथाम और संवर्धन इत्यादि के महत्व के बारे में जनता को जागरूक करना। ग. प्रकोप की शुरूआती पहचान के लिए एक समुदाय आधारित निगरानी प्रणाली (सीबीएसएस) स्थापित करना। घ. विशेष भौगोलिक क्षेत्र में वास करने वाली जनसंख्या के आयुष उपचारों की सुलभता में वृद्धि करना। iii कार्यनीति क. उस भौगोलिक क्षेत्र से क्रियाकलापों के लिए विशिष्ट प्रारूपों का निरूपण। कार्यान्वयन की ईकाई का आकार 2 ब्लॉक होंगे। ख. स्वास्थ्य शिक्षा समूह का निरूपण और प्रशिक्षण- 1. स्वास्थ्य पेशेवरों, शिक्षकों, लोक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और इलाके के स्थानीय स्व-सरकारी विभागों (एलएसजीडी) से नामांकित व्यक्तियों से मिलाकर एक स्वास्थ्य शिक्षा समूह का गठन किया जाए और पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाए। 2. यह प्रशिक्षित स्वास्थ्य शिक्षा समूह व्यवहार परिवर्तन संचार तकनीकों के माध्यम से समुदाय मध्यस्थता का कार्य हाथ में ले। 3. इस प्रशिक्षित स्वास्थ्य समूह का उपयोग पंचायत के प्रत्येक विभाग, शिक्षण संस्थाओं इत्यादि में तथा त्यौहार जैसे अपार भीड़ वाले विशेष अवसर इत्यादि के दौरान कार्यक्रमानुसार नियमित स्वास्थ्य शिक्षा कक्षाओं के संचालन में हो। 4. इन स्वास्थ्य कक्षाओं में वीडियो, पावर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण और पर्चे इत्यादि शामिल हैं। 5. फील्ड स्टाफ का चयन और प्रशिक्षण। 6. समुदाय आधारित निगरानी तंत्र के लिए सार्वजनिक हस्तक्षेप और आंकड़ा संग्रहण हेतु प्रशिक्षण दिया जाए। 7. परियोजना के अन्य हिस्सेदार नामत: स्थानीय स्वास्थ्य प्रदाताओं, स्थानीय नेताओं, स्थानीय स्व-सरकार और क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों की सहमति से स्वास्थ्य स्वच्छता मुहीम चलाएँ। 8. अध्ययन क्षेत्र स्वच्छता और रोगवाहक नियंत्रण उपायों के जन महत्व के बारे में 100% जन जागरूकतना प्राप्त करना। iv चिकित्सा शिविर - परियोजना के एक हिस्से के रूप में चिकित्सा शिविरों को या तो सामान्य स्वास्थ्य शिविरों अथवा किसी विशेष उद्देश्य के लिए आयोजित किया जाए। जनता को संचारी रोगों से लड़ने के लिए उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर उनके सामान्य स्वास्थ्य में वृद्धि के लिए आयुष औषधियां प्रदान की जा सकती हैं। v परिधीय बहिरंग रोगी विभाग- परिधीय ओपीडी में एक चिकित्सक, फार्मासिस्ट और फील्ड कार्यकर्ताओं युक्त एक चिकित्सक दल उपस्थित हो। यह दल नियमित अंतराल पर ओडीडी में उपस्थित रहेगा। vi परियोजना मूल्यांकन (तिमाही)- तिमाही मूल्यांकन रिपोर्ट आयुष विभाग को भेजी जाएगी। vii जन स्वास्थ्य पहुंच संबंधी गतिविधियों हेतु प्रत्येक जिले के लिए 2 ब्लॉकों की प्रत्येक ईकाई को 5.00 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। व्यवहार परिवर्तन संचार (बीसीसी) i देश का रोग-अधिभार संचारी रोगों से हटकर गैर संचारी रोगों की ओर जा रहा है। सभी गैर संचारी रोग जो सामान्यत- जीवन शैली में आए बदलावों और अपौष्टिक आहार के कारण उभर रहे हैं, के लिए सबसे महत्वपूर्ण रणनीति है प्रारंभिक रोकथाम और पता लगाना। रोगी और पर्यावरण तथा आहार कारकों पर विचार करते हुए रोग रोकथाम, स्वास्थ्य संवर्धन तथा विशिष्ट उपचारों के सुस्थापित सिद्धांतों के साथ आयुष चिकित्सा पद्धतियां फल-फूल रही हैं। ii पौष्टिक आहार और जनता दवारा अपनाए जाने वाली जीवन शैली के उन्नयन के माध्यम से रोगों की जल्द रोकथाम में आयुष क्षमताओं को मास मीडिया संचार रणनीति में शामिल करने की राज्य वकालत करेंगे जिसके लिए आयुष फ्लेक्सीपूल के तहत पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रस्तावित है। व्यवहार परिवर्तन संचार (बीसीसी)/आईईसी क्रियाकलापों के लिए प्रत्येक राज्य को प्रतिवर्ष 20.00 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। गतिशीलता समर्थन i मिशन के तहत परिकल्पित परिणामों की सफलता के केवल नियमित और व्यवस्थित निगरानी से ही नतीजे निकल सकते हैं। इसलिए, आवश्यक निगरानी क्रियाकलाप आयोजित करने के लिए राज्य और जिला पदाधिकारियों को समिति संचालन सहायता के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। तथापि, वाहन खरीदने की अनुमति नहीं है। ii राज्य स्तर पर प्रतिवर्ष 5.00 लाख रुपये तथा जिला स्तर पर प्रतिवर्ष 1.20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध है। आयुष ग्राम i आयुष ग्राम एक अवधारणा है जिसमें प्रति ब्लॉक एक गांव को आयुष जीवन शैली के तरीकों व अभ्यास को अपनाने तथा स्वास्थ्य परिचयी के उपचारों के लिए चयनित किया जाएगा। आयुष ग्राम के आयुष आधारित जीवन शैली का प्रचार व्यवहार परिवर्तन्न सूचना, स्थानीय औषधीय जड़ी-बूटियों की पहचान और उपयोग के लिए ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और आयुष स्वास्थ्य सेवाओं के प्रावधान के माध्यम से किया जाता है। चयनित ग्राम प्रतिनिधियों को इस अवधारणा के प्रति संवेदनशील किया जाता है ताकि समुदाय की तरफ भी सक्रिय भागीदारी हो सके। ii उद्देश्य क. आयुष चिकित्सा पद्धतियों में वर्णित उन आहार आदतों तथा जीवन शैलियों के अभ्यास हेतु समुदाय के भीतर जागरूकता फैलाना जिससे रोगों की रोकथाम करने तथा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिले। ख. लोगों को उन जड़ी-बूटियों के संरक्षण तथा खेती के लिए उनकी औषधीय गुणों की व्याख्या करके सलाह ठेना जो उनके आसपास मिलती है। ] ग. लोगों को उनके क्षेत्र में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियों के प्रयोग के माध्यम से सामान्य रोगों तथा इनके इलाज के बारे में सलाह देना। घ. संचारी रोगों यथा मलेरिया, टी.बी. और डायरिया इत्यादि के विरूद्ध अभियान चलाना तथा उनकी रोकथाम और उपचार के लिए उपाय करना। iii कार्यनीतियां आयुष चिकित्सा अधिकारी इस कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य योजनाओं को क्रियान्वित करेंगे तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को औषधीय पादपों की पहचान तथा घरेलु नुस्खों के तथा गांवों में वार्डों के स्वास्थ्य संबंधित मुद्दों की जानकारी प्रदान करेंगे। वह क्षेत्र में औषधीय जड़ी-बूटियों की पहचान करेगा ताकि इनका उपयोग और सुरक्षा सुनिश्चित हो। औषधीय पादप बोर्ड के सदस्य किसानों को औषधीय पादपों की खेती के लिए प्रेरित करेंगे तथा औषधीय पादपों की खेती के लिए आवश्यक जानकारी व सहायता प्रदान करेंगे। इस प्रोग्राम में शामिल स्वयं सहायता समूह घरेलु नुस्खों के रूप में औषधीय मिश्रणों को तैयार करेंगे तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सहायता से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं हेतु इनका उपयोग करने के लिए ग्रामीणों को जागरूक करेंगे। गांव के पारंपरिक चिकित्सकों को भी औषधीय पादपों तथा घरेलु नुस्खों के रूप में उनके उपयोग की पहचान करने के लिए शामिल किया जाएगा। iv प्रोग्राम के तहत आयुष औषधालयों के परिक्षेत्र में योग शिविरों का आयोजन तथा औषधीय जड़ी-बूटियां उगाने का कार्य भी किया जाए। जागरूकता शिविर के एक हिस्से के रूप में मौसमी बीमारियों की जानकारी और उनकी रोकथाम तथा नुक्कड़ नाटकों इत्यादि के माध्यम से सांस्कृतिक क्रियाकलाप आयोजित किए जाएंगे। v आयुष चिकित्सा अधिकारी अन्य स्टाफ के साथ प्रसवपूर्व देखभाल, प्रसवोपरांत देखभाल, शिशु देखभाल के साथ स्तनपान, टीकाकरण, संचारी रोगों, वृद्धावस्था देखभाल इत्यादि के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सहायता करके राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में योगदान देंगे। ये आयुष चिकित्सा अधिकारी स्कूलों में तथा चुनिंदा गांवों के आसपास स्वास्थ्य जांच शिविर भी आयोजित करेंगे। आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्कूल अध्यापकों को आयुष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। ग्राम पंचायतों के माध्यम से जागरूकता निर्माण क्रियाकलाप आयोजित शामिल किया जाएगा। इस प्रोग्राम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के नजदीक वाले गांवों को चयनित किया जाएगा जो रोग से जुड़े हुए हैं। पीएचसी/आयुष सुविधाओं के माध्यम से बीमार लोगों के लिए उपचार प्रदान किया जाएगा। vi इस संपूर्ण क्रियाकलाप के रिकार्ड का रखरखाव तथा मॉनिटरिंग एक जिला आयुष अधिकारी करेगा जो राज्य मुख्यालय को आंकड़े प्रेषित करेगा। vii एक राज्य में 5 से लेकर 15 गांवों में 10,000 की आबादी को शामिल करते हुए प्रति इकाई 10.00 लाख रुपये की वित्तीय सहायता। आयुष के माध्यम से स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम i आयुष चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से स्वास्थ्य, पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा तथा सेवाओं तक सहज पहुंच उपलब्ध कराना एक सरल और किफायती साधन है जिससे संचारी और गैर संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण में बड़ी मदद मिल सकती है। आयुष के माध्यम से स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम का केन्द्र बिंदु योग और परामर्श सहित आयुष सेवाएं प्रदान करने के माध्यम से स्कूली बच्चों की शारीरिक और मानसिक दोनों आवश्यकताओं का ध्यान रखना है। इस कार्यक्रम में निम्नलिखित घटक हैं- क. आयुष स्वास्थ्य और पोषण शिक्षा। ख. घरेलु उपचारों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पादपों तथा गृह उदयानों में फलते-फूलते औषधीय पादपों पर शिक्षा। ग. योगाभ्यास। घ. यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के मुद्दों पर शिक्षा। ड. स्वास्थ्य जांच-- सामान्य समस्याओं जैसेकि दृश्य और श्रव्य समस्याएं, शारीरिक विकलांगता, साधारण त्वचा की समस्याएं और सीखने की असमर्थता इत्यादि का जल्दी पता लगाना और प्रबंधन।। च. पोषण, रक्ताल्पता, कृमि संक्रमण प्रबंधन। छ. विकास और प्रसार। ज. स्वास्थ्य सेवाओों तथा स्थानीय उपचार क्रिया के साथ रेफरल संयोजन उपचारात्मक और निवारक उपाय के लिए आयुष मेडिकल कॉलेजों अथवा आयुष अस्पतालों के साथ रेफरल संयोजन भी किया जा सकता है। आयुष स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए नोडल शिक्षकों की पहचान की जानी चाहिए। ii किसी राज्य के लिए 2 ब्लॉकों की प्रति ईकाई को 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता के लिए चुना जाएगा। नम्य पल के तहत क्रियाकलाप I. योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा* सहित आयुष स्वास्थ्य केन्द्र। ॥. टेली-मेडिसिन। III. आयुष के माध्यम से खेल चिकित्सा। iv. सार्वजनिक निजी भागीदारी सहित आयुष को मुख्यधारा में लाने पर नवाचार। * योग स्वास्थ्य केंद्र प्रारंभिक साज सामान के लिए 0.6 लाख रूपए की एकमुश्त सहायता के पात्र हैं तथा श्रमशक्ति रखरखाव इत्यादि के लिए प्रतिवर्ष 5.4 लाख रूपए की आवर्ती सहायता के पात्र हैं और 20-30 बिस्तर वाले प्राकृतिक चिकित्सा अस्पताल 15 लाख रूपये की एकमुश्त सहायता के पात्र हैं (श्रमशक्ति सहित आवर्ती सहायता के रूप में प्रतिवर्ष 12 लाख रुपये तथा उपचार उपकरणों के लिए 3 लाख रूपए के एकमुश्त अनावर्ती सहायता) तथापि, किसी भी घटक पर नियत निधि का 5% से अधिक खर्च न करने की व्यवस्था की शर्त इस घटक पर लागू नहीं होगी I ऊपर वर्णित क्रियाकलापों के लिए राज्यों को आबंटित संसाधन पूल का शेष 20% घट-बढ़ तरीके से इस बाध्यता के साथ उपयोग किया जा सकता है कि संसाधन पूल के इस 20% को किसी भी मद पर इस सीमा तक खर्च किया जा सकता है कि नियत निधि का 5% से अधिक किसी भी घटक पर खर्च न हो। वित्तीय सहायता का सामान्य स्वरूप मिशन के विभिन्न घटकों के तहत सहायता का स्वरूप निम्नानुसार होगा- (i) विभिन्न घटकों का वित्तपोषण राज्य वार्षिक कार्य योजनाओं (एसएएपी) के आधार पर किया जाएगा। इन घटकों के लिए वित्तीय सहायता निर्धारित सीमा के अध्यधीन, वास्तविक आवश्यकता के लिए सीमित होगी। (ii) केन्द्र सरकार स्वीकार्य सहायता का 75% सहायता अनुदान के रूप में प्रदान करेगी तथा शेष 25% राशि का वहन संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों दवारा किया जाएगा, सिवाय पूर्वोत्तर राज्यों और जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखण्ड पहाडी राज्यों के, जहां पर केन्द्र का हिस्सा 90% होगा और शेष 10% का वहन राज्यों दवारा किया जाएगा। (iii) राज्य सरकारॉ को वित्तीय वर्ष 2014-15 से राजकोषीय मार्ग के माध्यम से मिशन के तहत स्वीकार्य वित्तीय सहायता हस्तांतिरत की जाएंगी जिसके बदले में राज्य अपने हिस्से के साथ राज्य आयुष सोसाइटियों को निधियां हस्तांतरित करेगा। सामान्य नियम एवं शर्ते i) मिशन के तहत, राज्य की वार्षिक कार्य योजना (एसएएपी) में किए गए प्रस्ताव के अनुसार आयुष स्वास्थ्य परिचर्या सुविधाओं के साथ-साथ लचीले घटकों को बढ़ावा देने के लिए निर्दिष्ट घटकों हेतु राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकार को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। ii) विभिन्न घटकों का निधियन अंतर खत्म करने के लिए किया जाएगा। घटक को वित्तीय सहायता उपरोक्त निर्धारित सीमा के अध्यधीन वास्तविक आवश्यकताओं तक सीमित होगी। iii) राज्य वार्षिक कार्य योजना को अपेक्षित सूचना विवरण सहित अनुलग्नको के रूप में संलग्न निर्धारित प्रारूप में दो प्रतियों में प्रस्तुत किया जाना होगा। iv) वर्ष के दौरान राशि का आंशिक या पूर्ण उपयोग न कर पाने की स्थिति में अनुदानग्राही संगठन वित्तीय वर्ष में राशि का उपयोग करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करेगा जिसका तत्संबंधी ब्यौरा जांच समिति को निर्णय करने के लिए प्रस्तुत करने हेतु विभाग को सूचित किया जाएगा। v) अनुदानग्राही संगठन को कार्य की वास्तविक प्रगति, आयुष ईकाई में रोगियों/आगन्तुकों की संख्या, रोग विशेष की यूनिट से प्रदत्त स्वास्थ्य परिचर्या सुविधाओं की ग्रहणशीलता और स्वीकार्यता स्पष्ट करते हुए तिमाही रिपोर्ट के साथ प्रासंगिक दस्तावेजों सहित व्यय की वित्तीय स्थिति प्रस्तुत करनी होगी। विभाग की संतुष्टि के लिए समय-समय पर इन दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के बाद पश्चातवर्ती अनुदान सहायता प्रदान की जाएगी। vi) क) मिशन के कार्यान्वयन के आवश्यक औषधों और दवाओं को आयुष विभाग, भारत सरकार द्वारा प्रकाशित आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होमियोपैथी के लिए आवश्यक औषध सूची (ईडीएल) से अधिप्राप्त करना होगा। ख) आयुष औषधियों और दवाईयों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, मेसर्स इंडियन मेडिसिन फार्मास्यूटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (भारत सरकार के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्रक उपक्रम) से अथवा राज्य सरकारों के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, अपनी स्वयं की विनिर्माण ईकाईयों में निर्माण करने तथा सुव्यवहार (जीएमपी) का अनुपालन करने वाले सहकारिता संस्थानों से प्राप्त औषधियों के लिए कम से कम 50% प्रदत्त अनुदान का उपयोग किया जाना चाहिए। ग) आयुष विभाग, भारत सरकार द्वारा आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होमियोपैथी की आवश्यक औषध सूची के अनुसार और वैध विनिर्माण अनुज्ञप्ति धारक अन्य उत्तर विनिर्माण व्यवहार (जीएमपी) वाली अनुपालना ईकाईयों से औषधियां प्राप्त करने के लिए मिशन के तहत प्रदत्त शेष अनुदान सहायता का उपयोग औषधियां खरीदने के लिए किया जा सकता है। घ) वांछित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अपेक्षितत विभिन्न घटकों के तहत औषधि/आवश्यक औषधों के लिए मंजूर राशि में से प्राथमिक चिकित्सा इत्यादि के लिए आवश्यक गैर औषधीय उत्पादों यथा मरहम-पट्टी उत्पादों के प्रयोजन हेतु कुल स्वीकृत राशि के पांच प्रतिशत की सीमा के अध्यधीन होगा। vi) नव-निर्मित भवन की मरम्मत और रखरखाव तथा अनुदान सहायता से खरीदे गए उपकरणों/यंत्रों के रखरखाव और अनुरक्षण सेवा के लिए पर्याप्त वार्षिक अनुरक्षण प्रावधान किए जाने चाहिए। viii) अस्पताल में उचित जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली स्थापित होनी चाहिए। ix) अस्पताल भवन में जल संचयन सुविधा प्रदान की जानी चाहिए। х) यह भवन पर्यावरण के अनुकूल होना चाहिए और राज्यों की स्थानीय संस्कृति के अनुरूप होना चाहिए। स्रोत: आयुष मंत्रालय, भारत सरकार राष्ट्रीय आयुष मिशन के विस्तृत दिशानिर्देश के लिए इस लिंक पर जाएँ