परिचय स्कीज़ोफ्रेनिया एक दीर्घकालिक मानसिक विकार (स्वास्थ्य स्थिति) है, जिसके कारण विभिन्न मनोवैज्ञानिक लक्षण उत्पन्न होते है। मतिभ्रम- कुछ ऐसा देखना और सुनना, जो कि वाकई मौजूद नहीं हैं। भ्रम- वास्तविकता पर आधारित असामान्य विश्वास, जो कि साक्ष्य के विपरीत होता हैं। भ्रमित विचार- मतिभ्रम या भ्रम पर आधारित भ्रमित विचार। परिवर्तन- व्यवहार में परिवर्तन। सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त अवसाद होने की संभावना होती है, जिसमें प्रमुखत: अवसाद और चिंता विकार शामिल हैं। लक्षण विचार और व्यवहार में परिवर्तन सिज़ोफ्रेनिया के सबसे विशिष्ट लक्षण हैं। इसमें निम्न शामिल है: मतिभ्रम: मतिभ्रम तब होता है, जब कोई व्यक्ति अनुभूति/सनसनी महसूस करता है, उसे लगता है कि कुछ है, लेकिन वास्तव में कुछ नहीं होता है। भ्रम: भ्रम दृढ़ विश्वास के साथ विचार है, जबकि यह गलत, अजीब या अवास्तविक दृष्टिकोण पर आधारित है। भ्रमित विचार (सोच विकार): मनोविकार से पीड़ित लोगों को प्राय: अपने विचारों और वार्तालापों पर नज़र रखने में परेशानी होती हैं। व्यवहार और विचार में परिवर्तन: व्यवहार व विचार अधिक अव्यवस्थित और अप्रत्याशित हो सकते है तथा उसकी उपस्थिति या पोशाक दूसरों को असामान्य लग सकती है। कारण सिज़ोफ्रेनिया के सही कारण ज्ञात नहीं है। यह सुझाव दिया जाता है कि शारीरिक, आनुवांशिक, मनोवैज्ञानिक और पर्यावरणीय संयोजित कारक लोगों में स्कीज़ोफ्रेनिया विकसित करने की संभावना उत्पन्न कर सकते है। ज़ोखिम कारक आनुवांशिक: परिवार में स्किज़ोफ्रेनिया का इतिहास है, लेकिन इसके लिए किसी भी जीन को उत्तरदायी नहीं पाया गया है। न्यूरोट्रांसमीटर: ये केमिकल हैं, जो कि मस्तिष्क में सूचनों का आदान प्रदान करते है। न्यूरोट्रांसमीटर और सिज़ोफ्रेनिया के बीच संबंध है, क्योंकि मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर में परिवर्तन करने वाली दवाएं सिज़ोफ्रेनिया के कुछ लक्षणों को दूर कर सकती हैं। जन्म और गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं गर्भावस्था के दौरान रक्त स्राव, गर्भावधि मधुमेह या प्री-एक्लम्पसिया। गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पलने वाले बच्चे की असामान्य वृद्धि जैसे कि जन्म के समय कम वज़न या छोटा सिर। गर्भावस्था के दौरान वायरस से संपर्क। जन्म के समय जटिलताएं, जैसे कि ऑक्सीजन की कमी (एस्थीक्सिया) और आपातकालीन शल्यक्रिया। तनाव: सिज़ोफ्रेनिया का मुख्य मनोवैज्ञानिक ट्रिगर जीवन की तनावपूर्ण घटनाएं जैसे कि प्रियजन की मृत्यु, नौकरी या घर खोना, तलाक या किसी रिश्ते का अंत, या शारीरिक, यौन, भावनात्मक या जातीय शोषण हैं । मादक पदार्थों का सेवन: कुछ विशेष दवाएं जैसे कि कैनबिस (भांग का पौधा), कोकीन, एलएसडी या एमफिटेमीन (उत्तेजक दवा), कुछ प्रकार के सिज़ोफ्रेनिया को उत्पन्न कर सकती हैं, विशेषकर उन लोगों में जो कि अतिसंवेदनशील हैं। निदान कोई परीक्षण उपलब्ध नहीं हैं। आमतौर पर रोग का पता लक्षणों के आधार पर लगाया जाता है। प्रबंधन सिज़ोफ्रेनिया का उपचार एंटीसाइकाटिक (मनोविकार के प्रति प्रभावकारी दवा) दवाओं से होता है, इनका उपयोग प्राय: मनोवैज्ञानिक और सामाजिक सहयोगात्मक संयोजन के साथ किया जाता है। दवा: सिज़ोफ्रेनिया के लिए प्रथम मनोवैज्ञानिक उपचार, एंटीसाइकाटिक (मनोविकार के प्रति प्रभावकारी दवा) दवा है, जो कि लगभग सात से चौदह दिनों में लक्षणों को कम कर सकती है। साइकोसोशल (मनोसामाजिक): कई मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप सिज़ोफ्रेनिया के उपचार में उपयोगी हो सकते हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: पारिवारिक उपचार। सकारात्मक सामुदायिक सहयोगात्मक उपचार। सहयोगात्मक रोज़गार। संज्ञानात्मक उपचार। नेशलन हेल्थ पाेर्टल एवं विकासपीडिया द्वारा स्वास्थ्य की बेहतर समझ के लिए केवल सांकेतिक जानकारी उपलब्ध कराई गई है। किसी भी निदान/उपचार के लिए कृपया अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्त्राेत : नेशलन हेल्थ पाेर्टल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय , भारत सरकार।