परिचय यह वैजोस्पेस्टिक विकार है, जिसके कारण उंगलियों, पैर की उंगलियों तथा कभी-कभी अन्य हिस्सों में विवर्णता हो जाती है। यह वह स्थिति है, जिसमें लंबे उभार के साथ नाख़ून नाज़ुक हो जाते है। रेनाद रोग सहित रेनाद की घटना (जिसे "प्राथमिक रेनाद की घटना" के नाम से भी जाना जाता है) से जाना जाता है। इस रोग का कारण अज्ञात है। रेनाद रोग ठंड या भावनात्मक तनाव से शुरू होता है, जिसमें रक्त वाहिकाओं को एक अस्थायी आंत्र में जाना होता है, जो कि रक्त के प्रवाह को अवरुद्ध करती है। विशेषकर, यह संवेदी तंत्रिका तंत्र की अति सक्रियता है, जिसके कारण परिधीय रक्त वाहिकाओं का वाहिकासंकीर्णन होता है, जो कि उत्तकों में ऑक्सीजन की कमी पैदा करता है। रेनाद रोग के क्रॉनिक, आवर्ती मामलों के परिणामस्वरुप त्वचा, त्वचा के नीचे के ऊतकों और मांसपेशी नष्ट हो जाती है। दुर्लभ मामलों में यह अल्सरेशन और इस्किमिक गैगरीन पैदा कर सकता है। लक्षण इस स्थिति में प्रभावित हाथों में दर्द, विवर्णता (पीलापन) तथा ठंड एवं सुन्नता की उत्तेजना होती है। सामान्यत: त्वचा पर ये परिवर्तन तीन चरणों में होते हैं: चरण पहला: शरीर का प्रभावित भाग सफ़ेद हो जाता है, क्योंकि रक्त की आपूर्ति बाधित होती है। चरण दूसरा: ऑक्सीजन की कमी के कारण शरीर नीला हो जाता है। इस चरण के दौरान शरीर का हिस्सा ठंडा और सुन्न हो जाता है। चरण तीसरा: शरीर का हिस्सा लाल हो जाता है, क्योंकि इस चरण के दौरान सामान्य दर की तुलना में रक्त उच्च दर से वापिस आता है, इसलिए वहाँ झुनझुनी या पीड़ादायक उत्तेजना होती है तथा शरीर के प्रभावित हिस्से में कुछ सूजन हो सकती है। कारण रेनाद रोग शरीर के हाथों-पैरों में अति संवेदनशील रक्त वाहिकाओं के परिणामस्वरुप होता है। बहुत सारे मामलों में किसी कारण की पहचान नहीं हो पाती है, यद्यपि कभी-कभी यह कारण अन्य स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़ें होते है। प्राथमिक रेनाद: रेनाद रोग का सबसे सामान्य प्रकार किसी अन्य स्वास्थ्य स्थिति से जुड़े बिना स्वयं प्रकट होता है। माध्यमिक रेनाद: कुछ मामलों में, इसमें अंतर्निहित कारण होते है, जो कि स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ें है, जिसके कारण रक्त वाहिकाएं ज़्यादा प्रतिक्रिया करती है। इसे माध्यमिक रेनाद कहा जाता है। ऑटोइम्यून की स्थिति। संक्रमण। कैंसर। ज़्यादा उपयोग करने के कारण चोट। निदान चिकित्सक द्वारा लिया गया चिकित्सीय इतिहास प्राय: बताएगा, कि रोग की स्थिति प्राथमिक है या माध्यमिक है। एक बार रोग की स्थिति प्रमाणित होने पर रेनाद रोग के संभावित माध्यमिक कारणों की पहचान करने के लिए विस्तार से परीक्षण किया जाता है। डिजिटल धमनी दबाव: हाथ के ठंडा हो चुकने के बाद और पहले उंगलियों की धमनियों के दबाव को मापा जाता है। जाँच (सकारात्मक) में कम से कम 15 एमएमएचजी की कमी हो जाती है। डॉपलर अल्ट्रासाउंड: रक्त प्रवाह को निर्धारित करने के लिए किया जाता है। पूर्ण रक्त गणना: यह नोरमोसिटी एनीमिया/रक्ताल्पता, क्रोनिक रोग या गुर्दें की विफलता को दर्शाता है। एंटीन्युक्लियर एंटीबॉडी (एएनए) परीक्षण: यह रक्त परीक्षण रक्त में एंटीन्युक्लियर एंटीबॉडी की जांच करता है। ये एंटीबॉडी प्रतिरक्षा प्रणाली से पैदा होते है। ये एंटीबॉडी शरीर के अपने ही उत्तकों पर हमला करते है। एरिथ्रोसाइट सेडीमेंटेशन रेट: यह रक्त परीक्षण मापता है, कि कितनी तेजी से लाल रक्त कोशिकाएं टेस्ट ट्यूब के नीचे स्थित हो जाती हैं? इनकी सामान्य रेट की तुलना में तेज़ी से गिरावट स्व-प्रतिरक्षित विकार को दर्शाती है। प्रबंधन प्राथमिक रेनाद: इसके मामले में मुख्यत ट्रिगर कारकों का प्रबंधन करके इसे प्रबंधित किया जाता है। माध्यमिक रेनाद का उपचार इसके अंतर्निहित कारकों को उपचारित करके किया जाता है। ड्रग थेरेपी: रेनॉड रोग के उपचार में प्रस्तावित दवाएं जैसे कि कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स (निफ़ीडिपाइन) या डिलटिज्म शामिल है। जटिलताएं रेनॉड रोग: इससे पीड़ित रोगियों में स्क्लेरोडर्मा जैसी समस्याएं विकसित होने का ज़ोखिम अधिक होता है। स्क्लेरोडर्मा: यह वह स्थिति है, जिसमें शरीर ज़रूरत से ज़्यादा कोलेजन का उच्च स्तर उत्पन्न करता है। नेशलन हेल्थ पाेर्टल एवं विकासपीडिया द्वारा स्वास्थ्य की बेहतर समझ के लिए केवल सांकेतिक जानकारी उपलब्ध कराई गई है। किसी भी निदान/उपचार के लिए कृपया अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्त्राेत : नेशलन हेल्थ पाेर्टल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय , भारत सरकार।