<h3 style="text-align: justify;">परिचय</h3> <p style="text-align: justify;">यह प्रतिरक्षा प्रणाली में परेशानी के कारण होने वाला रोग है, जो कि त्वचा को प्रभावित करता है। इसके कारण चमकीलेपन वाली त्वचा के साथ त्वचा, लाल, पपड़ीदार एवं परतदार हो जाती है। यह स्थिति संक्रामक नहीं है। अधिकांश लोग केवल अपने शरीर के छोटे पैच से प्रभावित होते हैं। सोरायसिस तब होता है, जब प्रतिरक्षा प्रणाली रोगज़नक़ के लिए सामान्य त्वचा कोशिका में दोष पैदा करती है तथा दोषपूर्ण संकेत भेजती है, जिससे नई त्वचा की कोशिका ज्यादा उत्पन्न होती है।<br /> <br />सोरायसिस संक्रामक नहीं है। इसे निम्नलिखित प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है:</p> <h3 style="text-align: justify;">गैर पुस्टलर/फुंसी के बिना</h3> <p style="text-align: justify;"><strong>सोरायसिस वुल्गारिस</strong></p> <p style="text-align: justify;">यह सोरायसिस का सबसे सामान्य प्रकार है। यह सोरायसिस से पीड़ित अस्सी से नब्बे प्रतिशत लोगों को प्रभावित करता है। सफ़ेद चमकीली पपड़ीदार त्वचा के साथ प्लाक/चमकीली त्वचा वाला सोरायसिस सामान्यत: लाल त्वचा के उभार के साथ होता है। इन हिस्सों को प्लाक/चमकीली त्वचा कहा जाता है।</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सोरिऐटिक ऐरिथ्रोडर्मा</strong></p> <p style="text-align: justify;">इसमें अधिकांश शरीर की सतह पर त्वचा का निकलना एवं व्यापक सूजन होना शामिल है। इसमें सामान्यत: गंभीर खुजली, सूजन और दर्द होता है। इस प्रकार का सोरायसिस घातक हो सकता है, अत्यधिक सूजन और त्वचा का निकलना, तापमान नियंत्रित करने की शरीर की क्षमता और त्वचा अवरोधक प्रक्रिया में बाधा डालता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">पुस्टलर/फुंसी सहित </h3> <p style="text-align: justify;">पुस्टलर सोरायसिस उभार के रूप में दिखाई देता है, जो कि असंक्रमित पस (पुस्टलर्स) से भरा होता है। पुस्टलर सोरायसिस कही भी हो सकता है, सामान्यत: हाथों एवं पैरों (पाल्मोप्लंटार पस्टुलोसिस) पर ज़्यादा होता है या शरीर के किसी भी हिस्से पर व्यापक चकत्ते हो सकते है।<br /> <br />इसमें शामिल है:</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>सामान्यीकृत पुस्टलर सोरायसिस (पुस्टलर सोरायसिस वोन जुम्बुश)।</li> <li>पस्टुलोसिस पाल्मारिस और प्लाटेरीस (लगातार पाल्मोप्लंटार पस्टुलोसिस, बारबर टाईप का पुस्टलर सोरायसिस, हाथ-पैर का पुस्टलर सोरायसिस)।</li> <li>वृत्ताकार पुस्टलर सोरायसिस।</li> <li>एक्रोडर्मोंटिटिस कन्टिन्यूम।</li> <li>इम्पिटाइगो हेपेटिफॉर्मिस/हर्प्टिफॉर्मिस।</li> </ul> <p style="text-align: justify;">सोरायसिस के अन्य प्रकारों में निम्नलिखित शामिल है:</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>औषधी-प्रेरित सोरायसिस।</li> <li>इन्वर्स सोरायसिस।</li> <li>नैपकिन सोरायसिस।</li> <li>सीब्रोरहाइक सोरायसिस।</li> </ul> <p style="text-align: justify;"><strong>गुटेट/चित्तीदार सोरायसिस</strong></p> <p style="text-align: justify;">इसे बहुत सारे छोटे, पपड़ीदार, लाल या गुलाबी, आंसू के आकार के घाव के रूप में जाना जाता है। <br /><strong> </strong><br /><strong>नेल सोरायसिस</strong></p> <p style="text-align: justify;">यह उंगली एवं पैरों के नाख़ून में कई प्रकार के परिवर्तन उत्पन्न करता है। इसमें नाख़ून के रंग में बदलाव, नाख़ून में दाग/गड्डे, नाख़ूनों में रेखाएं, नाख़ून के नीचे की त्वचा में जमाव तथा नाख़ून का निकलना एवं कमज़ोर होना शामिल है।<br /> <br /><strong>सोरिऐटिक आर्थ्राइटिस</strong></p> <p style="text-align: justify;">इसमें संधि/जोड़ एवं संयोजी ऊतक की सूजन शामिल है।<br /> <br /><strong>सोरायसिस आर्थ्राइटिस</strong></p> <p style="text-align: justify;">यह किसी भी संधि/जोड़ को प्रभावित कर सकता है, लेकिन यह सबसे अधिक उंगलियों एवं पैरों के जोड़ों को प्रभावित करता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">लक्षण </h3> <h4 style="text-align: justify;">प्लाक सोरायसिस</h4> <p style="text-align: justify;">इसके लक्षणों में शुष्क, लाल घाव वाली त्वचा शामिल है, जिसे प्लाक/चमकीली त्वचा के नाम से जाना जाता है। यह घाव प्लाक/चमकीली त्वचा से घिरे होते हैं। </p> <h4 style="text-align: justify;">गुटेट/चित्तीदार सोरायसिस </h4> <p style="text-align: justify;">इसके कारण छाती, बाजुओं, पैरों एवं सिर/खोपड़ी में (एक सेमी या 1/3 इंच से कम) आंसू के आकार के घाव हो जाते है। </p> <h3 style="text-align: justify;">कारण </h3> <p style="text-align: justify;">सोरायसिस ऑटोइम्यून/स्व-प्रतिरक्षित रोग है, जिसमें शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली अधिक सक्रिय हो जाती है तथा शरीर के सामान्य ऊतकों पर हमला करती है।</p> <h3 style="text-align: justify;">निदान</h3> <p style="text-align: justify;">सोरायसिस का निदान सामान्यत: त्वचा के आधार पर किया जाता है, इसके लिए कोई विशेष रक्त परीक्षण या नैदानिक प्रक्रिया नहीं है।</p> <h3 style="text-align: justify;">प्रबंधन </h3> <ul> <li style="text-align: justify;">ब्लेन्ड इमोलेटर और मॉइस्चराइज़र, मिनरल/खनिज तेल, और पेट्रोलियम जेली प्रभावित त्वचा को उपचारित करने में मदद करते हैं।</li> <li style="text-align: justify;">बिस्तर पर आराम।</li> <li style="text-align: justify;">जटिलताओं का उपचार (उदाहरण के लिए एंटीबायोटिक, मूत्रवध॔क औषधी (पेशाब अधिक जाने वाली दवा), पोषण संबंधी सहयोग)।</li> <li style="text-align: justify;"> मेथोटेरेक्सेट की कम ख़ुराक, सिकोलास्पोरिन या एसिटेटिन।</li> <li style="text-align: justify;">व्यक्तिगत मामलों में जैविकीय एजेंटों जैसे कि टीएनएफ-अल्फा इनहिबिटर अदलीमुमाब, एटनेरसेप्ट और इन्फ्लिक्जिमैब और उस्टेकिनुमाब से बेहत्तर परिणाम मिलने की सूचना प्राप्त हुयी है।</li> </ul> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : नेशनल हेल्थ पाेर्टल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार। </p>