सामान्य लक्षण कोई व्यक्ति कोरोना बीमारी से संक्रमित है या नहीं कैसे पता करें? कोरोना बीमारी से संक्रमित व्यक्तियों में इसके लक्षण किसी संक्रमित के संपर्क में आने के 2 से 14 दिनों के बाद दिखाई देते हैं। ये लक्षण शुरुआत में हल्के होते हैं और सामान्य तौर पर इनकी उपेक्षा की जाती है। कईयों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते जबकि उनमें संक्रमण हो सकता है। कोरोना संक्रमण से पीड़ित लोगों में लक्षण इस प्रकार के हो सकते हैं लक्षण कम खतरे वाली स्थितियां बुखार शरीर में दर्द खाने में स्वाद नहीं होना खांसी बदन में दर्द सूंघने की क्षमता खत्म होना नाक बहना पेट में दर्द आंखों का लाल होना गले में खराश खाना खाने की इच्छा नहीं होना ऊपर लिखे गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखे तो व्यक्ति को, जहां कहीं भी हो घर या बाहर बाकी लोगों से अलग रहना चाहिए। अधिक खतरे वाले संपर्क, पिछले 14 दिनों से किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना किसी संक्रमित व्यक्ति के कपडे या बर्तन के संपर्क में आना किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आना जिसको बुखार, सर्दी और खांसी थी। किसी संक्रमित व्यक्ति के आंखों का लाल होना द्गाारीरिक स्त्राव के संपर्क में आना। ऊपर लिखे लक्षणों मे कोई भी हो तो समझ लेना चाहिए कि किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क मे आ चुके हैं। अधिक खतरे वाली स्थितियां जिनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक हो। जिनकी उम्र 60 वर्ष से कम हो जिन्हें ह्रदय की बीमारी हो जिन्हें पहले से सांस संबंधी संक्रमण या बीमारी हो। डायबिटीज लीवर से संबंधित बीमारी हो। लंबे समय से बीमार हों। किडनी से संबधित बीमारी हो। दूसरी बीमारियों के कारण प्रतिरक्षण क्षमता का कमजोर होना,दवाएं और कैंसर की बीमारी का होना। ऊपर लिखे लक्षणों में से कोई भी एक होने पर वो व्यक्ति अधिक खतरे वाली श्रेणी में है उन्हें नजदीक के कोविड केयर सेंटर (ब्ब्ब्)/प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (च्भ्ब्)/सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (ब्भ्ब्)/जिला अस्पताल में ले जाएं। अस्पताल जाने की जरूरत किनको है? सांस लेने में कठिनाई हो रही हो लोगों को पहचानने की क्षमता खत्म होना। लगातार दर्द और और छाती में दबाव महसूस हो रहा हो। बहुत थका हुआ महसूस करना। असमंजस की स्थिति का बढ़ना नहीं समझ पाना कि वो कहां पर हैं। ऊपर लिखे लक्षणों में किसी एक लक्षण होने की अवस्था में तत्काल किसी चिकित्सा केंद्र में ले जाएं। हरे रंग के कॉलम वाले लक्षण अगर किसी व्यक्ति में सिर्फ हरे रंग के कॉलम वाले लक्षण हो यानी कोरोना के लक्षण हो तो क्या करना चाहिए? सबसे पहले तो उन्हें इसकी सूचना अपने निकट के स्वास्थ्यकर्मी को देकर निकट के स्वास्थ्य केंद्र में कोरोना जांच करवाना चाहिए।़ जब तक रिर्पोट नहीं आए तब तक खुद को घर के बाकी लोगों से अलग कर लेना चाहिए। अगर जांच में रिर्पोट पॉजिटिव आता है तो आपको लक्षण द्राुरू होने के समय से कम से कम 10 दिन के लिए खुद को घर में अलग कर लेना चाहिए। उस व्यक्ति को अपने घर के दूसरे सदस्यों से दूर रहना चाहिए। घर के दूसरे लोगों को भी कम से कम 10 दिन के लिए पृथकवास में यानी अलग रहना चाहिए। उन्हें कम जोखिम वाला समझा जाना चाहिए। यानी ऐसे लक्षण वाले रोगी घर में अलग रहकर किसी डॉक्टर की निगरानी में अपना इलाज कर सकते हैं। पर याद रखें उन्हें अपने डॉक्टर की सलाह पर ही ऐसा करना है। घबराएं या डरें नहीं। अधिकतर कम जोखिम वाले व्यक्ति जल्दी ही ठीक हो जाते हैं और उन्हें अस्पताल जाने की जरूरत नहीं होती। इस अवधि में अपने द्रारीर में पानी की कमी ना होने दें। पर्याप्त मात्रा मे पानी पीते रहें। हमेशा सुपाच्य और गर्म खाना खाएं।आराम करें और हल्के कार्य करें। अपने घर में ही रहें, बाहर नहीं जाएं। हाथों को नियमित तौर पर साबुन और पानी से धोते रहें। अपने कपड़ाें को साबुन और पानी से साफ करें। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति जिस किसी वस्तु को भी छू रहें हों, उसे भी साबुन पानी से धो दें हमेशा मास्क पहनें रहें। डबल मास्क या एन 95 या सर्जिकल मास्क लगाएं। यदि आपके पास कपडे का बना हुआ मास्क है तो उसका भी उपयोग कर सकते हैं। पर हर इस्तेमाल के बाद उसे साबुन पानी से धोना जरूरी होगा। दूसरे लोगों से दो गज की दूरी बना कर रहें। दिन में दो तीन बार नमक मिले पानी से गरारा करें। एक दिन में दो से तीन बार भाप लें। अगर तीन से पांच दिनों तक बेहतर महसूस ना कर रहें हों या स्थिति बिगड़ रही हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बुखार बढ़ने के क्या लक्षण हैं? शरीर को छूने पर गर्म लगे तो थर्मामीटर की सहायता से रोगी के द्रारीर के तापमान पर नजर रखें। दिन में कम से कम तीन चार बार थर्मामीटर से बुखार नापें जिससे पता चलता रहे कि बुखार कम है या ज्यादा। बुखार अधिक हो तो रोगी के माथे पर गीली पटिटयां रखकर द्रारीर के बढे हुए तापमान को कम करें। अगर बुखार कम ना हो रहा हो तो तत्काल इसकी सूचना गांव या निकट के स्वास्थ्य कार्यकर्ता को दें और अपना इलाज डाक्टरी परामर्श पर करें। अस्पताल कब जाएं? अगर किसी संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ हो, छाती में दर्द या दबाव हो, भ्रम की स्थिति या सोने में कठिनाई महसूस हो रही हो। सबसे पहले अपने निकट के स्वास्थ्य कार्यकर्ता, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या जिस डॉक्टर से इलाज करवा रहें हों उन्हें तत्काल सूचित करें। स्वास्थ्य कार्यकर्ता उस रोगी के ऑक्सीजन लेवल की जांच पल्स ऑक्सीमीटर से करते रहें। अगर रोगी का ऑक्सीजन लेवल 94 से नीचे हो तो उसकी सूचना तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर को दें। ऑक्सीजन लेवल 94 से नीचे होने पर खतरा हो सकत अपने डॉक्टर की सलाह पर तय करें कि घर पर रहकर इलाज हो सकता है या किसी अस्पताल में जाने की जरूरत है।ये सुनिश्चित करें कि संक्रमित व्यक्ति समेत सबने मास्क पहन रखा हो। ये भी सुनिश्चित करें कि रोगी द्वारा उपयोग की गई किसी भी वस्तु को छूने से पहले और बाद में साबुन पानी से धोया जाए। स्त्राेत : स्वास्थ्य और संचार पेशेवरों की टीम द्वारा विकसित, समन्वयक-डॉ प्रदीप कुमार , डॉ एस के चौधरी, डॉ स्वर्ण सुमन, रेणुका तिवारी एवं उपेंद्र मिश्रा।