बुखार बुखार अपने आप में बीमारी नहीं है पर लक्षण जरुर है| बुखार से रोगी बेचैन हो जाता है, दिल की धडकन बढ़ जाती है, पसीना आता है| उपचार हल्का कपड़ा पहनाए कम्बल न ओधाये, साफ चादर से ढकें | बदन को ठन्डे पानी से पोंछे| पानी में थोड़ा नमक डाल कर थोड़ी देर पर पिलाएं| पैरिसिया महल (क्रोसिन) कि टिकिया तीन चार बार दें| सिरदर्द और अर्धकपारी लक्षण : कुछ लोगों में सिरदर्द जल्दी-जल्दी होता है। इससे दिमागी तनाव हो जाता है। यह कोई गंभीर बीमारी के कारण हो सकता है। सबसे जरुरी यह जानना है कि किस प्रकार के सिर दर्द है ? किस तरह का सिर दर्द-दबाव देने वाला, धीमा, ज्यादा देर तक रहने वाला दोनों तरफ या एक तरफक आगे कि ओर या पीछे कि ओर कितनी देर रहता है- कुछ मिनट कुछ घंटे या कुछ दिन दिन में कब अधिक सिर दर्द - सुबह, दोपहर या शाम होता है क्या करने से सिर दर्द- तनाव से, पढाई करने के बाद या सिर झुकाकर बैठने से होता है कब हालत बेकाबू हो जाती है – खाने के बाद, शराब पीने के बाद कब रहत मिलती है- आराम करने से, दवा लेने से उपचार एस्प्रिन की गोली लेना गर्म पानी में भिगोए गए कपड़े को सिर के पीछे रखने मालिस करना आराम करना तनाव दूर करना अर्धकपारी लक्षण बहुत तेज सिर दर्द, सिर के एक हिस्से में तेज रोशनी, तनाव, शराब पीने, गुस्सा रहने या चिडचिडाहट से अध्कापधि हो सकता है। अधकपारी जल्दी-जल्दी महीने में एक बार या काफी दिनों बाद भी हो सकता है। शुरुआत में धुंधला दिखाई पड़ना, रोशनी में धब्बा दिखना या एक हाथ या पांव का सुन्न हो जाना। आँखे लाल हो जाती है, कई बार चक्कर या उल्टी होती है। उपचार बिना दूध के काली चाय के साथ दो एस्प्रिन की गोलियाँ लें। अन्धेरी जगह में आराम से लेटें, समस्याओं को भूलने की कोशिश करें। खांसी लक्षण : अक्सर होने वाली शिकायत कई तरह के रोग के होने कई चेतावनी है, जो गले या फेफड़े कई बीमारी हो सकती है| खांसी तब होती है जब साँस कई नली में किसी तरह कई रुकावट आती है| धूल, धुवां ठंढी या गरम हवा से खांसी आ सकती है| साँस कई नली, फेफड़ों के जीवाणु को साफ रखने के लिए खांसी प्रकृति कई एक जरूरत है| खांसी होने के कारणों को जानने कई कोशिश करें: क्या खांसी जल्दी-जल्दी आती है क्या बुखार भी साथ में रहता है क्या थूक के साथ-साथ खून भी आता है क्या व्यक्ति बीडी, सिगरेट या हुक्का पीता है किस तरह कई खांसी किस रोग के तरफ इशारा करती है। सुखी खांसी, जिसमे बलगम नहीं निकलता है फ्लू, खसरा, फेफडो में कीड़े बलगम वाली खांसी निमुनियाँ, ब्राकैतिस घरघराहट के साथ आने वाली खांसी दमा, काली खांसी, गला घोंटू, दिल कई बीमारी लगातार आने वाली खांसी टी. बी. (तपेदिक) दमा खांसी में खून आना टी बी. निमुनिया, दिल कई बीमारी उपचार : थोड़ी-थोड़ी देर के बाद पानी पिएं खौलते पानी का माप नाक की नली और मुहं में जाने दें। खौलते पानी में पुदीना या यूकिलिप्टस का पत्ता डालने से राहत मिलती है| खांसी आने पर बीडी,सिगरेट या हुक्का न पिएं। ज्यादा दिन तक खांसी आवे तो डाक्टर से जाँच करवा लें कि आपको टी.बी. तो नहीं हो गया है। बचाव अच्छी नींद, सेहतमंद भोजन किसी खासने वाले के पास बैटने पर नाक और मुहं पर कपड़ा रखें। आपको अगर खांसी आती है तो मुहं – नाक पर कपड़ा रख कर खांसे। पेट का दर्द लक्षण : पेट का दर्द आने वाले रोग की तरफ इशारा करती है। जैसे- आंतों की समस्या किडनी(गुर्दा) या लीवर की बीमारी। उपचार ज्यादा दर्द हो तो डाक्टर की राय लें ताकि सही कारण पता लग सके। उल्टियाँ बहुत से लोगों में, खासकर बच्चों में, पेट की गडबडियों में उल्टी भी आती है। उल्टियाँ कुछ खास तरह की बिमारियों की तरफ इशारा करती है। जैसे- आंत के रोग, पेट में जहर, मलेरिया, हेपेतैटिस, टांसिल का बढ़ना, मूत्र नली के रोग उल्टियाँ कभी-कभी खतरनाक हालत की तरफ इशारा करती है, तब डाक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। ऐसे समय जब बदन में पानी निकलने पर काबू न किया जा सके। चौबीस घंटे से अधिक तक बार-बार उल्टी आवे। जब उल्टी का रंग हरा या भूरा हो और उसमें बदबू भी आती हो। जब रोगी को मल न आ रही हो। उल्टी के साथ-साथ खून भी निकले। उपचार उल्टियाँ तेज हो तो दो-तीन घंटे कुछ नहीं खाना चाहिए। बिना दूध की चाय पिएं, उसमे नीबू का रस और अदरख का रस मिला दें। एक ग्लास पानी में एक चुटकी नमक और एक चम्मच चीनी या गुड मिला कर थोड़ी-थोड़ी देर पर पिलाएँ। ओ.आर.एस.का घोल पिलाएँ। शरीर में पानी की कमी न होने दें। बच्चों में बदन से पानी निकलना ज्यादा खतरनाक होता है, विशेष ख्याल की जरूरत पड़ती है। पूछें /देखें पानी की कमी नहीं थोड़ी कमी गंभीर कमी -एक दिन में कितने बार दस्त लगता - क्या उल्टी भी आई -क्या बच्चे नें पेशाब की? - क्या प्यास लगी? चार बार से कम नहीं या थोड़ा सा रोज की तरह ज्यादा प्यासा नहीं चार से दस बार दस्त थोड़ी उल्टियाँ आई कम मात्रा में काफी पीली काफी प्यासा, ढेर पानी पिया दस से ज्यादा बार दस्त काफी उल्टियाँ आई पिछले छह घंटे में बिलकुल भी पेशाब नहीं की| बिलकुल भी पानी नहीं थी देखें कमी नहीं थोड़ा गंभीर -उसकी हालत - आँखों में आंसू - उसकी आँखे महसूस करें -उसकी चमड़ी की चुटकी करने पर -नाडी की गति -सिर का तलवा ठीक, चुस्त, परेशान है ठीक-ठाक चुटकी छोड़ने पर वापस आपने पहले की हालत में हमेशा की तरह हमेंशा की तरह उदास या बेहोशी बिलकुल नहीं कोई आंसू नहीं, आंखे धसी हुई धीरे-धीरे वापस की हालत में आना तेज धंसा हुआ बहुत नींद आयी बिलकुल ही नहीं और आंखे धसी हुई बहुत धीमी गति से वापस की हालत में आती है बहुत तेज कमजोरी की हालत बहुत धंसा हुआ बदन में पानी घटने पर बेहोशी का दौरा पड़ सकता है, बदन ऐंठने लगता है। तुरत सावधानी बरतिए बार बार पानी, सरबत, चाय, शोरबा देते रहें खाना बन्द करें। छोटे बच्चे को माँ का दूध पिलाते रहें ओ. आर. एस. का घोल थोड़ी-थोड़ी देर पर पिलाते रहें घर पर ओ. आर. एस. जैसा घोल बनाने के लिए एक लीटर पानी को उबले और ठण्डा करें उसमें आधा चम्मच नमक पिलाएं और आठ चम्मच चीनी मिलाएं यह घोल थोड़ी-थोड़ी देर पर दें, पर जल्द ही ओ. आर. एस. पौडर दवा की दुकान या स्वास्थ्य केंद्र से ले आएं| दस्त और पेचिस पतले पानी जैसे मल को दस्त आना कहते हैं और मल के साथ कफ या खून आने पर पेचिस का नाम दिया जाता है| दस्त आने के मुख्य कारण पोषण की कमी यानि सेहतमंद भोजन न देना दूध का न पचना आंत का फलू मलेरिया एड्स बसी भोजन ठीक से पका मांस या भोजन को न खाना बचाव दो प्रमुख कारणों से बचना : छूत से और सेहत मन्द भोजन की कमी घर और आस पड़ोस की सफाई बच्चों को बोतल के दूध के बदले माँ का दूध पिलाना। उपचार बदन में पानी की कमी न होने दें भोजन बन्द न करें चाय, शरबत, शोरबा जैसी चीजें थोड़ी-थोड़ी देर पर देते रहें छोटे बच्चों की माँ अपना दूध पिलाती रहे । गठिया – जोड़ो का दर्द बड़ी उम्र के लोगों में गठिया का इलाज पूरी तरह से नहीं किया जा सकता। पर दर्द होने पर कुछ राह पहुँचाया जा सकता है। संभव हो तो बहुत कठिन मेहनत से बचें गठिया के साथ अगर बुखार भी हो तो आराम करने से राहत मिलती दुखते जोड़ों को गरम पानी से सेंकने से भी आराम मिलता है एस्प्रिन की गोली दर्द को कम करता है – दिन में चार बार तीन-तीन गोलियाँ लें थोड़ा चलते फिरते रहना चाहिए नहीं तो जोड़ो में जकड़न हो जाएगी। पीठ का दर्द लक्षण अगर काफी दिनों से पीठ का दर्द पीठ के ऊपरी हिस्से में हो, साथ ही साथ खांसी और वजन में कमी आ जाए तो फेफड़े का टी. बी. हो सकता है। अगर बच्चे के पीठ में दर्द हो तो रीढ़ की हड्डी का तो टी. बी. हो सकता है। अधिक वजन उठाने से भी पीठ का दर्द हो जाता है। कंधे को झुका कर खड़ा होना या बैठना पीठ दर्द का कारण होता है। बचाव अगर पीठ का दर्द टी.बी., पेशाब की नली की बीमारी या पिताशय के रोग के कारण हो तो पहले मूल बीमारी का इलाज कराएं। हमेशा सीधा खड़ा हों और सीधा ही बैठें। सीधी चारपाई, चौकी या जमीन पर सोएं। बवासीर मल निकलने के स्थान में मांस उभर जाता है। यह काफी दर्द देने वाला होता है, पर खतरनाक नहीं होता।खूनी बवासीर भी होता है और बिना खून वाला भी। इलाज हल्के गरम पानी से एक टब भर लें। उसमें थोड़ा सा लाल दवाई (पोटाशियम परमेगनेट) मिलाएं। आधे घंटे तक उसमें बैठें। आराम मिलेगा। कुछ जड़ी-बूटी जैसे नागफनी बवासीर पर लगाने से भी राहत मिलती है। बवासीर का कारण ज्यादातर कब्ज से होता है। इससे बचने के लिए रेशेदार भोजन लें। जैसे मूली, कच्चा केला , ओल। बहुत खून आए और आप्रेशन की जरुरत हो तो डाक्टर से मिलना चाहिए। पावों और बदन के दूसरे हिस्सों में सूजन पावों की सूजन कई समस्याओ के कारण हो सकती है। कुछ समस्याएं छोटी होती हैं और कई बहुत गंभीर। लेकिन अगर पावों के साथ-साथ बदन के दूसरे हिस्सों में, खास कर चेहरा में भी अगर सूजन आ जाए तो लक्षण किसी गंभीर बीमारी की तरफ इशारा करता है. कभी-कभी गर्भवती महिलाओं के आखिरी तीन महीनों में सूजन आ जाती है यह खतरनाक नहीं होती है। बड़ी उम्र के लोगों में काफी देर खड़े रहने से या बैठे रहने से भी पावों की सूजन हो सकती है। लेकिन यह दूसरे रोगों के तरफ भी इशारा करती है – जैसे दिल की बीमारी, गुर्दे का रोग तथा पेशाब की नल का रोग। उपचार पहले पावों के सूजन किस रोग से होता है, उसे जाने और उचित इलाज करावें। भोजन में नमक बिल्कुल न लें तो ठीक है, नहीं तो थोड़ी मात्रा में लें. ऐसे पत्तों का काढ़ा पिएं जिससे पेशाब ज्यादा आता है। पावों को लटकाकर न बैठें, इससे सूजन ज्यादा बढ़ जाती है। दौरे पड़ना, बदन में ऐंठन पड़ना जब कोई व्यक्ति बेहोश हो जाता है या उसका बदन ऐंठने लगता है तो हम कहते हैं उसे दौरा पड़ गया है| दौरे दिमाग की समस्या से पड़ते हैं| बच्चों में तेज बुखार या बदन में पानी की कमी के कारण दौरे पड़ते हैं। अधिक दौरे पड़ने पर मिरगी की बीमारी हो सकती है : दौरे के कारण पता करें और उसका इलाज कराएँ बच्चे को तेज बुखार हो तो बदन को ठंडा पानी से पोंछे दिमागी बुखार की हालत में डाक्टर से पूछकर मलेरिया का इलाज कराएं। मिरगी मिरगी के रोगी पूरी तरह स्वस्थ दिखाई पड़ते हैं, पर उन्हें दौरे पडतें हैं। दौरे कुछ घंटों दिनों या सालों के बाद भी पड़ सकते हैं। कुछ लोग दौरे पड़ने के समय बेहोश हो जाते हैं। कुछ लोग दौरे पड़ने पर हाथ पांव फेंकने लगते हैं। उनकी आँखे धंस जाती है। दौरे पड़ने पर कुछ लोग अजीब तरह का व्यवहार करते हैं मिरगी छूत का रोग नहीं है। हाँ रोग जीवन भर रहता है। बचपन में अगर मिरगी की बीमारी लग जाए तो ठीक भी हो सकती है दौरे पड़ने पर व्यक्ति को दांतों के बीच लकड़ी का टुकड़ा या चाभी रख दें ताकि वह अपनी जीभ न काट सके। दौरे के समय उसे पकड़ने या बांधने की कोशिश कतई न करें आग, तीखे पत्थर से उसका बचाव करें, ताकि वह अपने को घायल न कर सके आस-पास जमा भीड़ को हटा दें ताकि मरीज को तजि हवा लगे| दौरा ठीक होने पर उल्टी आ सकती है| ठीक हालत में आने के लिए उसे सुला दें| स्त्रोत: संसर्ग, ज़ेवियर समाज सेवा संस्थान