आँखों की जाँच उपचार शुरू करने के पहले आँखों की जाँच आँखों के डाक्टर से करा लेनी चाहिए। आंखे बहुत ही कोमल होती है, ठीक से देखभाल न करने पर छूत तुरन्त लगती है। आँखों को साफ पानी से धोना चाहिए, सोने के पहले आँखों को साफ करें ताकि दिन भर के धूल – मैल साफ हो जाएं। आँखों को पोछने के लिए धुले कपड़े का ही इस्तेमाल करें नहीं तो तुरन्त खतरनाक छूत लग सकती है। सूरमा या काजल लगाने के लिए खास तरह के साफ सफाई का ही इस्तेमाल करें। सड़क पर बैठे अनाड़ी लोगों को कभी भी आंखे न दिखाएँ पालक, सहिजन जैसे हरे पतों वाले साग खूब खाएं पीली सब्जी और फल गाजर, कुम्हारा, पपीता, आम का खूब इस्तेमाल करें ताकि रतौधी जैसे रोग न हो। खतरे के लक्षण कोई ऐसा जिससे आंख का तारा कट जाए सफेद हिस्से पर दुखने वाला भूरा दाग आँखों के दरद के साथ सिरदर्द या उल्टी भी हो आँखों की रोशनी धीमी पड़ने लगे ऐसे किसी भी हालत में आँखों के डाक्टर से जरूर मिलें। आँखों को चोट लगना आँखों के किसी तरह के चोट खतरनाक हो सकती है। इससे आप अंधे भी हो सकते हैं। सफेद हिस्से पर चोट लगने पर नजर में खराबी आ सकती है। अगर चोट से आंखे लाल हो जाए तो डाक्टर को दिखाएँ। कुछ खास समय आँखों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। लापरवाही से पटाखा जलाने पर गुल्ली डंडा खेलने पर धनुष वाण चलाने पर वेल्डिंग करते समय किसी तरह के रसायन के इस्तेमाल के समय घूंसे का चोट उपचार आँखों पर चोट लगने के बाद उसे मोटे नरम कपड़े से ढक दें। अगर इस उपचार से आराम नहीं मिलता है तो डाक्टर को दिखाएँ। बचाव खाना बनाते समय आग से दूर बैठें रसायनिक खाद या अन्य चीजों के उपयोग के बाद हांथों को अच्छी तरह धो लें। ध्यान रखें कि बच्चे ऐसी जगह न खेलें जहां झुकी हुई टहनियाँ या लम्बे घास उगे हों। आँखों से धूल या अन्य चीजों को बाहर निकलना पानी से बार-बार धोएँ घुले कपड़े से आँखों की पपनियों को साफ करें खुद से सफाई नहीं होती है तो डाक्टर से मिलें। आंख आना, आँखों का सूजना कभी-कभी आंखे गुलाबी या लाल हो जाती है। उनमें जलन होता है,पानी बहता है। सुबह उठने पर दोनों पपनियाँ आपस में चिपकी मिलती है। उपचार : आँखों को साफ करने के लिए एक गिलास में चुटकी भर नमक डाल कर उबाल लें और उसे ठंडा होने दें। अपने हाथों को साबुन पानी से धो लें। अब आँखों उबले पानी से धोएँ, दोनों पपनियों पर पानी डालें। बचाव आंख आना बड़ा छुतहा होता है एक बच्चे से दूसरे बच्चे को या घर और आस पड़ोस के सभी लोगों के आंख आ सकते हैं। इसलिए रोगी को घर के अन्दर ही अलग थलग रहने दें। नदी नाले में ऐसे समय न नहाएं भीड़ वाली जगह न जाएं संभव हो तो धूप का काला चश्मा लगाएं रोहा(ट्रैकोमा) रोहा रोग बहुत लम्बे समय के लिए हो जाता है। यह महीनें या साल तक रहता है अगर जल्दी ही इसका इलाज नहीं किया जाता है तो व्यक्ति अन्धा भी हो सकता है यह रोग छुतहा होता है, मक्खियाँ इसे एक आंख से दूसरे के आंख में फैलाती हैं। लक्षण रोहा रोग के शुरू में आंखे लाल हो जाती हैं और उनसे पानी बहता है लगभग एक महीने बाद आँखों के ऊपरी पुतली में छोटी-छोटी गुलाबी गिल्टियाँ बन जाती हैं आँखों के सफेद हिस्से में लाली आ जाती है और जलन होती है कई सालों के बाद गिल्टियाँ गायब हो जाती हैं पुतलियाँ के अन्दर सफेद रंग के धब्बे छोड़ जाते हैं इन धब्बों के कारण पुतलियाँ मोटी हो जाती है और आंखे पूरी तरह नहीं खुल पाती है ये धब्बे बरौनियों को आंख के अन्दर मोड देती है उन्हीं खरोचों से अंधापन आ जाता है। उपचार उपचार डाक्टर देख-रेख में ही करें। भैंगापन अगर छ महीने के किसी बच्चे के एक आंख कि पुतली आंख के बीच में न हो – दाएँ या बाएं हो तो वह गलत दिशा में देखेगा। ऐसे बच्चे भेंगे हो जाते हैं। डाक्टरी इलाज से ही इसमें सुधर लाया जा सकता है। जरूरत है कि बचपन में बच्चों के आँखों कि डाक्टरी जांच होनी चाहिए मोतियाबिन्द आँखों का पीछे वाला हिस्सा धुंधला हो जाता है। यह रोग बुढ़ापे में होता है। ऑपरेशन करने के बाद इस रोग में सुधार होता है। रतौंधी यह रोग एक – पांच साल के बच्चों में बहुत होता है। यह रोग खान-पान ठीक न रहने (विटामिन ए की कमी) से होता है। रात में दिखाई नहीं देने वालों रोग रतौंधी होता है। यदि शुरू में ही इलाज शुरू हो जाता है तो रोग ठीक हो जाता है नहीं तो बच्चा अंधा भी हो सकता है। लक्षण शुरू में बच्चा अंधेरे में उतनी अच्छी तरह से नहीं देख पाता है धीरे-धीरे आंखे सूखने लगती है आँखों का सफेद हिस्सा अपना रंग खोने लगता है आखिर में आँखों पर झुरियां पड़ने लगती है जैसे-जैसे रोग बढ़ता है आँखों की सूखापन बढ़ता जाता है, उनमें छोटे-छोटे गड्डे भी बन जाते हैं जल्दी ही साफ सफेद हिस्सा नरम पड़ने लगता है वह फूल जाता है और फट भी सकता है बच्चे को दस्त काली-खांसी या टी.बी. हो सकता है सभी बीमार और कम वजन वाले बच्चों की आँखों की जांच करवाएं बचाव और उपचार : विटामिन ए वाले भोजन का अधिक इस्तेमाल करें- पपीता, गाजर, कुम्हरा, आम, टमाटर हरी साग भी खूब खाएं बच्चों को हर महीने विटामिन ए का घोल मुहं से पिलाएं। डाक्टर से अलग-अलग उम्र के लिए खुराक पूछ लें। बच्चों को दो साल तक माँ अपना दूध पिलाएं स्त्रोत: संसर्ग, ज़ेवियर समाज सेवा संस्थान।