परिचय अमीबियासिस एक परजीवी संक्रमण (संक्रामक रोग) है, जो कि प्रोटोजोन एण्टामीबा हिस्टोलिटिका/हिस्टोलाइटिका (परजीवी जीवाणु) के कारण होता है। केवल दस प्रतिशत से बीस प्रतिशत लोग, जो कि ई हिस्टोलिटिका से संक्रमित हैं, इस संक्रमण से बीमार होते हैं। यह किसी को भी प्रभावित कर सकता है। हालांकि यह उन लोगों में बेहद सामान्य है, जो कि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ख़राब स्वच्छता (अस्वच्छता) की स्थिति में रहते हैं। अमीबियासिस मनुष्य में जठरांत्र-नली (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रेक्ट) का एक सामान्य संक्रमण है। यह जलवायु की तुलना में अस्वच्छता और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से अधिक निकटता से जुड़ा है। यह पूरे विश्व में पाया जाता है। यह चीन, दक्षिण पूर्व और पश्चिम एशिया तथा लैटिन अमेरिका, विशेषकर मैक्सिको में एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है। अमीबियासिस लगभग पंद्रह प्रतिशत भारतीय आबादी को प्रभावित करता है। यह पूरे भारत में पाया जाता है। इनवेसिव अमीबियासिस संभावित घातक रोग होने के अलावा, इसके महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी हैं। अस्थायी असमर्थ संक्रमण, जिसमें श्रमजीवी आयु वर्ग के वयस्क पुरुष शामिल हैं, उन्हें पूरी तरह से ठीक होने में कई हफ्तों और दो से तीन महीनों तक अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता हो सकती है। अमीबियासिस प्रतिरक्षाहीनता से पीड़ित लोगों, समलैंगिकों और कुछ उष्णकटिबंधीय देशों से आप्रवासियों और यात्रियों में समस्याओं का कारण हो सकता है। लक्षण अमीबियासिस में अलक्षणी संक्रमण, डायरिया/दस्त और पेचिश या प्रवाहिका, कोलाइटिस (आंतों में सूजन) और पेरिटोनिटिस (पेट की झिल्ली का रोग) और आंतों के अलावा कई अंगों में विस्तृत लक्षण हो सकते है। तीव्र अमीबियासिस प्राय: कम और बहुधा खूनी अतिसार के साथ दस्त/डायरिया या पेचिश के रूप में हो सकता है। दीर्घकालिक अमीबियासिस जठरांत्र (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल) लक्षणों सहित थकान, वज़न में कमी और कभी-कभी बुख़ार के साथ होता है। अमीबियासिस आंत के अलावा शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित कर सकता है। यदि परजीवी अन्य अंगों में फैलता है, तो सबसे अधिक यकृत में फैलता है, जहां यह ‘अमीबिक यकृत फोड़ा (लीवर एब्सेस)’ का कारण बनता है। ‘अमीबिक यकृत फोड़ा’ बुख़ार और पेट के दाहिने ऊपरी चतुर्थ भाग में दर्द के साथ होता है। इसमें प्लुरोपुलमोनरी (फुप्फ़ुस-संबंधी), कार्डियक (हृदय संबंधी), सेरेब्रल (प्रमस्तिष्कीय), रीनल (गुर्दे संबंधी), जेनिटोरिनरी (मूत्रजननांगी/जनन मूत्रीय), पेरिटोनियल (ऊपरी परत) और त्वचा सहित अन्य अंग शामिल हैं। विकसित देशों में अमीबियासिस मुख्यत: स्थानिक क्षेत्रों से आने वाले प्रवासियों और यात्रियों, समलैंगिकों (पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों) और असंक्राम्य असंवेदनशीलता/इम्यूनोसप्रेस्ड (शरीर को पर्याप्त रूप से संक्रमण से लड़ने के लिए कम क्षमता) या संस्थागत व्यक्तियों को प्रभावित करता है। कारण अमीबियासिस प्रोटोजोन एण्टामीबा हिस्टोलाइटिका (परजीवी जीवाणु) के कारण होता है। प्रोटोजोन, एण्टामीबा हिस्टोलिटिका प्रजातियां, मनुष्य की बड़ी आंत को अपना घर बनाती हैं, लेकिन उनमें सब रोग से जुड़ी नहीं हैं। यह ट्रोफ़ोज़ॉइट्स और सिस्टिक फॉर्म (सिस्ट) दो प्रकार की होती है। ट्रोफ़ोज़ॉइट्स बृहदान्त्र में बढ़ते और सिस्ट बनाते हैं। सिस्ट मल में उत्सर्जित होते हैं तथा मनुष्यों के लिए संक्रामक भी होते हैं। सिस्ट मल, पानी, सीवेज (गंदे नाले) और नमी की उपस्थिति में मिट्टी और कम तापमान में कई दिनों तक विकाससक्षम और संक्रामक रहते हैं। संचारण निम्नलिखित के माध्यम से होता है: मल-मौखिक मार्ग या तो प्रत्यक्ष व्यक्ति-से-व्यक्ति के संपर्क या अप्रत्यक्ष रूप से दूषित खाद्य पदार्थ या पानी, जिनमें कीटाणु हों, उनका सेवन करने से संचारित होता है मौखिक-गुदा संपर्क से यौन संचारण, जिसे विशेषकर पुरुष समलैंगिकों में जाना जाता है। मक्खियों, तिलचट्टा और कृन्तकों जैसे वाहक संक्रमण संचारित करते हैं। ई हिस्टोलिटिका संक्रमण की ऊष्मायन अवधि सामान्यत: दो से चार सप्ताह है, लेकिन कुछ दिनों से लेकर वर्षों तक हो सकती है। कृषि प्रयोजनों के लिए मल उपयोग रोग फैलाता है। महामारी/प्रकोप (एक निश्चित समयावधि के दौरान किसी समुदाय या क्षेत्र में रोग के अत्यधिक मामलों के घटित होने की संभावना) सामान्यत: जल आपूर्ति में सीवेज रिसाव (गंदे पानी के रिसाव) से जुड़ा हैं। निदान एण्टामीबा हिस्टोलिटिका को अन्य आंतों के प्रोटोजोन से अलग किया जाना चाहिए। ई. हिस्टोलिटिका के निदान के लिए मल में सिस्ट और ट्रॉफोज़ोइट्स की सूक्ष्मदर्शी द्वारा पहचान सामान्य प्रकिया है। विभेदक (अलग करना) सिस्ट और ट्रोफ़ोज़ॉइट्स के मॉर्फोलोजिक विशिष्ट लक्षणों पर आधारित है। इसके अलावा, ई. हिस्टोलिटिका ट्रोफ़ोज़ॉइट्स को कोलोनोस्कोपी या सर्जरी के दौरान प्राप्त किए गए ऐस्परेशन या बायोप्सी नमूनों से भी पहचाना जा सकता है। इम्यूनोडायग्नोसिस एंटीबॉडी का पता लगाना एंजाइमइम्यूनोअरसे (ईआईए) आंतों के अलावा कई अंगों यानि, ‘अमीबिक यकृत फोड़ा’ से पीड़ित रोगियों में सबसे अधिक उपयोगी है, जब जीव आमतौर पर मल परीक्षण में नहीं पाये जाते हैं। अप्रत्यक्ष लाल कोशिका-समूहन (आईएचए)- यदि ‘संदिग्ध अमीबिक यकृत फोड़ा’ की तीव्र उपस्थिति से पीड़ित रोगियों में एंटीबॉडी का पता नहीं लगता है, तो सात से दस दिनों के बाद एक दूसरा नमूना लिया जाता है। यदि दूसरा नमूना सीरो-परिवर्तन (सेरोकनवर्सन) नहीं दिखाता है, तो अन्य परीक्षणों पर विचार किया जाता है। पता लगाने योग्य ई. हिस्टोलिटिका-विशिष्ट एंटीबॉडी सफल उपचार के बाद वर्षों तक बना रह सकता हैं, इसलिए एंटीबॉडी की उपस्थिति आवश्यक रूप से तीव्र या वर्तमान संक्रमण का संकेत नहीं देती है। एंटीजन का पता लगाना एंटीजन का पता लगाना रोगजनक और गैर रोगजनक संक्रमण में अंतर और परजीवी निदान के लिए सूक्ष्मदर्शी रोग निदान में सहायक के रूप में उपयोगी हो सकता है। आणविक निदान पारंपरिक पोलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया (पीसीआर) रोगनिदान प्रयोगशालाओं के संदर्भ, पीसीआर-आधारित अरसे द्वारा आणविक विश्लेषण को रोगजनक प्रजातियों (ई. हिस्टोलिटिका) और गैर रोगजनक प्रजातियों (ई. डिस्पर) के बीच अंतर करने के लिए प्रमुखता दी जाती है।रेडियोग्राफी, अल्ट्रासोनोग्राफी, कम्प्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) और 'मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग' (एमआरआई) का उपयोग लीवर फोड़ा, सेरेब्रल अमीबियासिस का पता लगाने के लिए किया जाता है। रेक्टोसिग्म्डोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी आंत अमीबासिस के लक्षणों की जानकारी प्रदान करते हैं। प्रबंधन लक्षणात्मक आंत संक्रमण और आंत के अलावा शरीर के अन्य अंगों में अमीबियासिस के लिए एंटीअमीबिक दवाओं से उपचार चिकित्सक के परामर्श से किया जाना चाहिए। ई. हिस्टोलिटिका से संक्रमित अलक्षणी रोगियों का उपचार भी एंटीअमीबिक दवाओं से किया जाना चाहिए, क्योंकि वे दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं तथा यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाएं, तो वे एक वर्ष के भीतर चार से दस प्रतिशत तक रोग का विकास करते हैं। यकृत ऐस्परेशन यकृत ऐस्परेशन केवल तब किया जाता है, जब फोड़ा (> 12 सेमी) बड़ा है, फोड़ा फूटने को है, चिकित्सा थेरेपी विफल हो गयी है या फोड़ा बाएं भाग में उपस्थित हैं। जटिलताएं अमीबिक कोलाइटिस की जटिलताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: फल्मनेट या नेक्रोटाइज़िंग कोलाइटिस। विषाक्त महाबृहदांत्र (टॉक्सिक मेगाकोलोंन)। अमेबोमा। रेक्टो वजाइनल फिस्टुला (मलाशय-योनि)। अमीबिक यकृत फोड़ा’ की जटिलताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: द्वितीयक जीवाणु संक्रमण के साथ या बिना इंट्रापेरिटोनियल, इन्त्रथोरासिक या इंट्रापेरिकार्डियल रेप्चर। फुस्फुस आवरण या पेरीकार्डियम (हृदयावरण) का प्रत्यक्ष विस्तार। मस्तिष्क फोड़े का फैलाव और गठन। अमीबीसिस के कारण होने वाली अन्य जटिलताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: आंत-संबंधी छिद्रण। जठरांत्र रक्तस्राव/गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग। आंत का सिकुड़ना। इंटुस्सुसेप्शन (जब आपकी आंत का एक हिस्सा दूसरे के अंदर दूरबीन की तरह स्लाइड कर जाता है तब यह दर्दनाक विकार का कारण बनता है, जिसे इंटुस्सुसेप्शन कहा जाता है)। पेरिटोनिटिस (पेट की झिल्ली का रोग)। पूयात्मक फुफ्फुसावरण शोथ (फेफड़े को चारों ओर से ढकने वाली एक झिल्ली होती है और झिल्ली व फेफड़े के बीच एक प्रकार का तरल भरा रहता है। जब किसी कारण से इसमें जमा तरल पीप या मवाद बन जाता है, तो उसे पूयात्मक फुफ्फुसावरण शोथ कहते है)। रोकथाम अमीबियासिस को विशिष्ट और गैर-विशिष्ट दोनों उपायों द्वारा रोका और नियंत्रित किया जा सकता है। गैर-विशिष्ट उपायों में निम्नलिखित है- पानी की बेहतर आपूर्ति पानी कीटाणुशोधन के लिए उपयोग की जाने वाली क्लोरीन की मात्रा से सिस्ट समाप्त नहीं होते है। अमीबासिस के खिलाफ़ पानी के शुद्धिकरण के लिए रासायनिक उपचार की तुलना में पानी को छानना और उबालना अधिक प्रभावी है। स्वच्छता शौच के बाद, भोजन संभालने और खाने से पहले हाथ धोने की स्वच्छता पद्धति अपनाने के साथ मानव मल का सुरक्षित निपटान। खाद्य सुरक्षा कच्चे फल, सब्जियों और छिलके वाले फलों को खाने से पहले स्वच्छ एवं सुरक्षित पानी से अच्छी तरह से धोया जाना चाहिए तथा खाने से पहले सब्जियों को उबालें। उपायों में मक्खियों और तिलचट्टों से भोजन की सुरक्षा तथा इन कीड़ों का नियंत्रण भी शामिल है। वाहक, जो कि सिस्ट पारित करते हैं तथा ये भोजन संभालने, चाहे वह घर में हो, सड़क के किनारे छोटी दुकान या भोजनालय में हो, में होते हैं। उनका सक्रियता से पता लगाया जाना चाहिए तथा उपचार किया जाना चाहिए, क्योंकि वे अमीबीसिस के प्रमुख प्रेषक (प्रसारित करने वाले वाहक) होते हैं। स्वच्छता और खाद्य स्वच्छता के बारे में सब स्तरों पर जनता और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए स्वास्थ्य शिक्षा प्राथमिक स्वच्छता पद्धतियों को संचार मीडिया का उपयोग करके सामयिक अभियानों के माध्यम से विद्यालयों, स्वास्थ्य देखभाल इकाइयों और घरों में प्रसारित और निरंतर सुदढ़ किया जाना चाहिए। सामाजिक और आर्थिक विकास व्यक्तिगत और सामुदायिक निवारणीय उपायों का कार्यान्वयन (जैसे कि हाथों धोना, पर्याप्त उत्सर्जन/मल निपटान), इन गतिविधियों का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए। जब भी संभव हों, निम्नलिखित विशिष्ट उपायों को अपनाया जाना चाहिए अमीबायसिस के संबंध में स्थानीय महामारी विज्ञान की स्थिति की निगरानी के लिए सामुदायिक सर्वेक्षण; मामलों के प्रबंधन में सुधार यानि कि सामुदायिक और स्वास्थ्य केंद्रों के स्तरों सहित स्वास्थ्य सेवाओं के सभी स्तरों पर इनवेसिव अमीबियासिस से पीड़ित रोगियों का पर्याप्त उपचार और त्वरित निदान; उन स्थितियों की निगरानी और नियंत्रण, जो कि अमीबायसिस का प्रसारण बढ़ाते हैं, जैसे कि शरणार्थी शिविर, दूषित सार्वजनिक जल स्रोत। विकासपीडिया द्वारा स्वास्थ्य की बेहतर समझ के लिए केवल सांकेतिक जानकारी प्रदान की गई है। किसी भी निदान/उपचार के लिए कृपया अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्त्राेत : नेशलन हेल्थ पाेर्टल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय , भारत सरकार।