<div id="MiddleColumn_internal"> <h3 style="text-align: justify;">परिचय</h3> <p style="text-align: justify;"><img class="image-right" src="https://static.vikaspedia.in/media/images_hi/health/diseases/93094b91793593f91c94d91e93e928/copy26_of_.jpg" /></p> <p style="text-align: justify;">हर किसी को सरदर्द का अनुभव अवश्य होता है। लेकिन सरदर्द के अलग अलग कारण और प्रकार है। संभवत: सरदर्द का मुख्य कारण सिर की धमनियॉं और मांसपेशी में तनाव पैदा होना। इसको हम सामान्य सरदर्द कहेंगे। लेकिन कभी कभी सरदर्द मस्तिष्क की बिमारी के कारण भी होता है। या कभी और संस्थानों के कारण भी सरदर्द हो सकता है। सामान्य सरदर्द का इलाज भी आसान है। सरदर्द की लगभग ९०% घटनाओं में सरदर्द सामान्य होता है। इसके लिये दर्दनिवारक गोली काफी है। अब हम सरदर्द के प्रकार और कारण जान लेंगे।</p> <h3 style="text-align: justify;">सामान्य सरदर्द</h3> <p style="text-align: justify;">मस्तिष्क या शरीर के अन्य संस्थानों में सरदर्द का कारण ना हो तो सरदर्द सामान्य समझना चाहिये। इसके भी तीन प्रकार है। तनाव सरदर्द -यह सरदर्द मानसिक तनाव से, अतिश्रम, निराशा, गरमी या मौसम के बदलाव से होता है। सिर के मांस पेशीयोंमें तनाव होना यही इसमें मुख्य बिंदू है।</p> <p style="text-align: justify;">अधसिसी का सरदर्द बार बार निकलता है। अक्सर यह किशोरावस्था में शुरू होता है। आम तौरपर यह सरदर्द सिर के एक ही तरफ होता है। अक्सर इसके पहले उल्टियॉं होती है। आवर्ती सरदर्द- यह प्रकार बार बार उभरनेवाला सरदर्द का है। संभवत: १-२ घंटेके बाद सरदर्द चला जाता है। लेकिन कुछ दिनों के बाद सरदर्द वापस लौटता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">अन्य संस्थानों से संबंधित सरदर्द</h3> <p style="text-align: justify;">बुखारवाले बीमारियों में सरदर्द होना आम बात है, जैसे की फ्लू, मलेरिया, डेंगू, टायफाईड आदि।</p> <p style="text-align: justify;">मस्तिष्क में संक्रमण, गांठ या सूजन से भी सरदर्द होता है। दृष्टीदोष, कम या ज्यादा रक्तचाप, रक्तशर्करा कम होना अम्लता, माहवारी पूर्व तनाव, सायनस सूजन, हवा का दबाव कम या ज्यादा होना, उष्माघात आदि कारणों से भी सरदर्द होता है।</p> <p style="text-align: justify;">कुछ दवाओं के दुष्प्रभावसे सरदर्द होता है। शराब भी सरदर्द का एक कारण हो सकता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">इलाज</h3> <p style="text-align: justify;">पहले सरदर्द का कारण जानना जरुरी है। सामान्य सरदर्द के लिये पॅरासिटामॉल या अन्य दर्दशामक गोली पर्याप्त होती है। आयुर्वेद के अनुसार त्रिभुवनकिर्ती उपयोगी है। होमिओपथी में सरदर्द के लिये सही दवा चयन आवश्यक है। एक बार सुनिश्चित की हुई दवा समय समय पर प्रयोग कर सकते है। मर्मबिंदू दबाव याने ऍक्युप्रेशर का भी प्रयोग उपयोगी है। शिरोभाग में मुख्य बिंदू याने ब्रह्मबिंदू पर अपनी उंगली से एक मिनिट तक दबाए। इसके साथ रोगी को लंबी सांस लेकर शांति से छोडेने को कहिये। इस प्रयोग से धीरे धीरे सरदर्द कम होता है।</p> <p style="text-align: justify;">कभी कभी सरदर्द केवल विश्राम, शिथिलीकरण या अच्छी नींद से ठीक होता है। सरदर्द ज्यादा या हमेशा होता हो तब डॉक्टर से जॉंच करनी चाहिये। सरदर्द अन्य शरीर संस्थानों के कारण होनेकी आशंका पर डॉक्टर से मिलना चाहिये। सरदर्द के लिये रक्तचाप नापना आवश्यक है। कभी कभी अन्य टेस्ट भी जरुरी हो सकते है जैसे की खून की जॉंच, सीटी स्कॅन या एम.आर.आय.।</p> <h3 style="text-align: justify;">योगशास्त्र का प्रयोग</h3> <p style="text-align: justify;">यौगिक शुद्धिकरण जैसे जलनेती, प्राणायाम, वमन आदिसे चिरकालीन सरदर्द ठीक हो सकते है। शवासन शिथिलीकरण के लिये महत्त्वपूर्ण है। इसके सही तकनीक योग शिक्षक के द्वारा सीखना चाहिये। या सिर को मालिश करने से रक्तपरिसंचरण बढकर तनाव सरदर्द ठीक होता है। अपचन के कारण होनेवाला सरदर्द उल्टी होनेपर ठीक हो जाता है।</p> <p style="text-align: justify;"> </p> <p style="text-align: justify;"><strong> स्त्रोत: </strong><a class="ext-link-icon" title="अधिक जानकारी के लिए " href="http://www.bharatswasthya.net/" target="_blank" rel="noopener"> भारत स्वास्थ्य</a></p> </div>