<h3 style="text-align: justify;">भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी </h3> <p style="text-align: justify;">भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने ऐसी सृजनात्‍मक सोच पर काम किया है जो अल्जाइमर रोग से जुड़ी भूलने की आदत को रोकने या कम करने में मदद कर सकते हैं। अनुसंधान दल का नेतृत्व बायोसाइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी गुवाहाटी के प्रोफेसर वाइबिन रामकृष्णन, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी गुवाहाटी केप्रोफेसर हर्षल नेमाड़े ने किया। उन्होंने अल्जाइमर के न्यूरोकेमिकल सिद्धांतों का अध्ययन कियाऔर मस्तिष्क में न्यूरोटॉक्सिक अणुओं का संचय रोकने के नए तरीकों की खोज की जो भूलने की आदत से जुड़े हैं।</p> <p style="text-align: justify;"><img src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cimages_(1).jpg" width="250" height="190" /></p> <h3 style="text-align: justify;">न्यूरोटॉक्सिक अणुओं का संचय रोकना</h3> <p style="text-align: justify;">आईआईटी गुवाहाटी टीम ने कम वोल्टेज वाले विद्युत क्षेत्र के अनुप्रयोग और मस्तिष्क में न्यूरोटॉक्सिक अणुओं को एकत्र होने से रोकने के लिए ‘ट्रोजन पेप्टाइड्स’के उपयोग जैसे दिलचस्प तरीकों की जानकारी की। वैज्ञानिकों को उनके कार्यों में शोध छात्र डॉ. गौरव पांडे और श्री जाह्नु सैकियाने सहायता की। उनके अध्ययनों के परिणाम एसीएस केमिकल न्यूरोसाइंस, रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री के आरएससी एडवांस, बीबीए और न्यूरोपेप्टाइड जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">मरीजों की संख्या में भारत का तीसरा स्थान</h3> <p style="text-align: justify;">अल्जाइमर रोग का इलाज भारत में विकसित करने का महत्व है क्योंकि चीन और अमेरिका के बाद, दुनिया में अल्जाइमर के रोगियों की तीसरी सबसे बड़ी संख्या भारत में है, भारत में 40 लाख से अधिक लोग अल्‍जाइमर से जुड़ी भूलने की आदत के शिकार हैं। वर्तमान उपचारों में केवल रोग के कुछ लक्षण कम हो जाते हैं, फिर भी चिकित्‍सा संबंधी कोई ऐसी विध्‍वंसक पद्धति नहीं है जो अल्जाइमर के अंतर्निहित कारणों का इलाज कर सकती हो। परियोजना के समन्वयक डॉ. रामाकृष्णन ने सूचित किया कि, "अल्जाइमर रोग के इलाज के लिए लगभग सौ संभावित दवाएं 1998 और 2011 के बीच विफल रही हैं, जो समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।"</p> <h3 style="text-align: justify;">एमीलॉइड बीटा पेप्टाइड्स</h3> <p style="text-align: justify;">अल्जाइमर का एक निर्धारक हॉलमार्क मस्तिष्क में एमीलॉइड बीटा पेप्टाइड्स का संचय है। डॉ. रामाकृष्णन और डॉ.नेमाड़े ने अल्जाइमर की प्रगति को रोकने के लिए इन पेप्टाइड्स के संचय को कम करने के तरीकों की तलाश की।</p> <p style="text-align: justify;"><img src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccdownload.jpg" width="250" height="190" /></p> <h3 style="text-align: justify;">सुरक्षित विद्युत क्षेत्र के अनुप्रयोग</h3> <p style="text-align: justify;">2019 में, आईआईटीगुवाहाटी के वैज्ञानिकों ने पाया कि कम-वोल्टेज, सुरक्षित विद्युत क्षेत्र के अनुप्रयोग से विषाक्त न्यूरोडीजेनेरेटिव अणुओं का निर्माण और संचय कम हो सकता है जो अल्जाइमर रोग में भूलने का कारण बनते हैं। उन्होंने पाया कि बाहरी विद्युत / चुंबकीय क्षेत्र इन पेप्टाइड अणुओं की संरचना को व्‍यवस्थित करता है, जिससे एकत्रीकरण को रोका जा सकता है।“विद्युत क्षेत्र के संपर्क में आने पर, हम तंत्रिका कोशिकाओं के पतन को 17–35 प्रतिशत तक सीमित कर सकते हैं। डॉ. रामाकृष्णन का कहना है, "इस बीमारी की शुरुआत में लगभग 10 साल की देरी होगी।"</p> <h3 style="text-align: justify;">ट्रोजन पेप्टाइड्स का रोचक उपयोग</h3> <p style="text-align: justify;">इस क्षेत्र में आगे काम करते हुए, वैज्ञानिकों ने इन न्यूरोटॉक्सिन अणुओं के एकत्रीकरण को रोकने के लिए ‘ट्रोजन पेप्टाइड्स ’का उपयोग करने की संभावना का पता लगाया। ‘ट्रोजन पेप्टाइड ’का उपयोग करने का विचार पौराणिक" ट्रोजन हॉर्स "से आता है, जिसका ट्रॉय की लड़ाई में यूनानियों ने दांव-पेच के रूप में इस्तेमाल किया था। शोधकर्ताओं ने ट्रोजन पेप्टाइड्स को अमाइलॉइड पेप्टाइड के एकत्रीकरण को रोकने के लिए ‘छल-कपट’के समान दृष्टिकोण को अपनाते हुए, विषाक्त फाइब्रिलर संयोजन का गठन रोकने और भूलने की आदत की ओर ले जाने वाली तंत्रिका की विषाक्तता को कम करने के लिए डिज़ाइन किया है। परियोजना समन्वयक, डॉ. रामकृष्णन और डॉ. नीमेड ने बताया कि,हमारे शोध ने एक अलग रास्ता प्रदान किया है जो अल्जाइमर रोग की शुरुआत की अवधि को बढ़ा सकता है। हालांकि, इस तरह के नए चिकित्सीय दृष्टिकोणों को मानव उपचार में लाने से पहले पशु मॉडल और नैदानिक परीक्षणों में इसका परीक्षण किया जाएगा।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्रोत : पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार । </p>