<div id="MiddleColumn_internal"> <h3 style="text-align: justify;">परिचय</h3> <p style="text-align: justify;">हृत्शूल या हृदयवेदना याने अंजायना छाती में हो रहे हर एक दर्द से संबंधित नहीं है। छाती में दर्द के अनेक कारण है जैसे की फँसली या मांसपेशी को बाधा, जठर में अम्लता, न्यूमोनिया और अन्य हृदयविकार।</p> <p style="text-align: justify;">हृदयवेदना या अंजायना हल्के दर्द से लेकर तीव्र शूलतक किसी भी रूप में आ सकती है। कहा जाये तो हृदयवेदना हृदय की बीमारी की पहली सीढ़ी है। हृदयवेदना की पहली सीढ़ी है श्रम के साथ आनेवाला दर्द। आराम करने से ये पीड़ा रुक जाती है। हृदयवेदना की अगली सीढ़ी विनाश्रम के ही होने वाली वेदना है।</p> <h3 style="text-align: justify;">जानकारी</h3> <p style="text-align: justify;">मूलरूप से हृदय की धमनियों में वसा की परत जमना और फलस्वरुप धमनियों का सख्त होना यही इसका कारण है। वसा के परत के भीतर होते हुए धमनियों से खून कम बहता है। आदमी विश्राम में बैठा हो तो ये कम खून भी पर्याप्त होता है। लेकिन श्रम के कारण खून की जरुरत बढ़ती है और कमी महसूस होती है जिससे दर्द होता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">हृदयवेदना का निदान</h3> <p style="text-align: justify;">हृदवेदना विशिष्ट श्रम के अनंतर या मानसिक तनाव, अतिशीत, जादा भोजन या धूम्रपानसे जान पड़ती है।</p> <p style="text-align: justify;">यह दर्द आधे मिनट से पॉंच मिनट तक रह सकता है। इसकी जगह छाती में बांये तरफ होती है। यह दर्द बांया कंधा, हाथ, गर्दन और जबड़ा या पीठ के तरफ या नाभी के दिशा में चलता महसूस होता है। लेकिन यह वेदना उपर जबड़ा और नीचे नाभी इसे पार नही जाती। यह दर्द आराम करनेसे और नायट्रोग्लिसरिन दवा से रुक जाता है। ये तथ्य समझना जरुरी है।</p> <h3 style="text-align: justify;">इलाज</h3> <p style="text-align: justify;">हृदय वेदना उभरने पर तुरंत विश्राम करें, शांति से सहन करें और नायट्रोग्लिसरिन दवा का प्रयोग करे। इससे दर्द रूक जाता है। हृदयवेदना हो तब भागदौड़ न करते हुए एक जगह ही स्वस्थ रहना उचित होता है। भागदौड़, भय या भावनिक प्रभाव से दिल की खून की जरुरत और भी बढ़ती है।</p> <p style="text-align: justify;">नायट्रोग्लिसरिन दवा गोली या स्प्रे के रूप आता है। इससे दर्द २-५ मिनटों में रुक जाता है। इस दवा से धमनियॉं खुलकर जादा खून बहता है। हृदयवेदना के रोगी यह दवा हमेशा साथ रखें। इस दवा की चिपकाने वाली पट्टी भी मिलती है। इसी के साथ ऍस्पिरिन गोली एक कप पानी में घुलाकर ये पानी तुरंत पी लें। इससे खून पतला और प्रवाही रहता है। हृदयवेदना असल में दिल की बीमारी की पहली सीढ़ी ही है। इसलिये सावधानी बरतें और डॉक्टर से संपर्क करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">डॉक्टरी इलाज के बारे में</h3> <ul style="text-align: justify;"> <li>जरुरत होने पर अस्पताल में भर्ती होना ठीक होगा।</li> <li>डॉक्टरी सलाह के नुसार कार्डिओग्राम, स्ट्रेस टेस्ट, इको टेस्ट या कभी एन्जिओग्राङ्गीभी आवश्यक होती है।</li> <li>धमनियोंका अटकाव जादा हो तब एन्जिओप्लास्टी या बायपास का ऑपरेशन भी जरुरी हो सकता है।</li> </ul> <h3 style="text-align: justify;">प्रतिबंध</h3> <p style="text-align: justify;">स्वास्थ्यपूर्ण रहन-सहन, कसरत और व्यायाम, खासकर एरोबिक्स के नियमित आचरण से हम इस रोग को कुछ हद तक टाल सकते हैं।</p> <p style="text-align: justify;">इसी के साथ धूम्रपान और तनाव से बचना, रक्तचाप और रक्तशर्करा सही मर्यादा में रहना, वजन कम रखना ये सब सावधानी अवश्य निभानी है। लेकिन एक बार हृदयवेदना अनुभव होने पर काफी सावधानी और प्रयास आवश्यक है। नायट्रोग्लिसरिन और ऍस्पिरिन सिर्फ एक नैमित्तिक दवा है। इसके असली धोखे समझकर सही इलाज होना जरुरी है। अपनी दवाओं को हमेशा साथ रखे।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्रोत: <a class="external_link ext-link-icon external-link" title=" भारत स्वास्थ्य (नए विंडोज में खुलने वाली अन्य वेबसाइट लिंक)" href="http://www.bharatswasthya.net" target="_blank" rel="noopener"> भारत स्वास्थ्य </a></p> <p style="text-align: justify;"> </p> </div>